
प्रयागराज: प्रयागराज के महाकुंभ में सोमवार को बसंत पंचमी के दिन अंतिम अमृत स्नान शुरू हो चुका है। अखाड़ों के साथ-साथ श्रद्धालु भी अमृत स्नान कर रहे हैं। जुलूस में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत बारी-बारी से त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगा रहे हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार सोमवार तड़के से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। विभिन्न अखाड़ों के महामंडलेश्वरों ने जुलूस का नेतृत्व किया।
जानकारी के अनुसार सबसे पहले नागा साधुओं ने डुबकी लगाई। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा और जूना अखाड़ा स्नान कर चुका है। बाकी अखाड़ों के स्नान का क्रम भी जारी है।
अमृत स्नान को शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे व्यक्ति को जीवन के सभी पापों से मुक्ति मिलती है और विभिन्न प्रकार के कष्टों से भी राहत मिलती है।
तीसरे अमृत स्नान पर दुनिया भर से पहुंचे श्रद्धालुओं का संगम नगरी पर तांता लगा है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर रखी है।
स्वामी कैलाशानंद गिरि जी ने कहा कि आज बसंत पंचमी के अवसर पर देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। आज तीसरा 'अमृत स्नान' भी है। आज का दिन बहुत पवित्र है। नागा साधु भी बड़ी संख्या में अमृत स्नान के लिए त्रिवेणी संगम में पहुंचे हैं।
आज क्राउड मैनेज करने के लिए ऑपरेशन इलेवन चलाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से वन वे रूट तैयार किया गया है। इसके अलावा पांटून पुलों पर मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की दिक्कत न आए, इसका भी विशेष इंतजाम किया गया है।
कुंभ मेला अधिकारियों द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार ‘अमृत स्नान’ सुबह 4 बजे संन्यासी संप्रदाय के अखाड़ों के साथ शुरू हुआ। पवित्र जुलूस का नेतृत्व श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा, श्री तपोनिधि पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा, श्री पंचायती अखाड़ा आनंद, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा और श्री पंचाग्नि अखाड़ा ने किया। हर अखाड़े को अमृत स्नान के लिए 40 मिनट का समय दिया गया है।
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Published : 3 February 2025, 8:55 AM IST
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