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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पांच साल पहले चुनी गयी गांवों की सरकार का कार्यकाल 25 दिसंबर को खत्म हो चुका है। इसी के साथ ग्राम प्रधानों के वित्तीय अधिकार भी सीज कर दिये गये हैं। ग्रामीण विकास के लिये जरूरी गांवों की नई सरकार का गठन कब होगा, इसका अभी तक कोई अता-पता नहीं है क्योंकि अभी चुनाव के लिये तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है।
कोरोना महामारी जैसे बड़े कारण के चलते ग्राम प्रधान के चुनावों में हो रही देरी को लेकर डाइनामाइट न्यूज ने यूपी की जनता से बातचीत की। यह भी जानने का प्रयास किया गया कि क्या ग्राम प्रधान के चुनावों में हो रही देरी के लिये राज्य सरकार जिम्मेदार है? लोगों ने इस सवाल के जबाव पर अपनी राय खुलकर सामने रखी।
डाइनामाइट न्यूज से बातचीत में कई लोगों ने यूपी में ग्राम पंचायत के चुनावों में देरी के लिये राज्य सरकार को भी जिम्मेदार माना। ऐसे लोगों को कहना था कि जब बिहार और अन्य राज्यों में विधान सभा चुनाव हो सकते हैं तो ग्राम प्रधान के चुनाव क्यों नहीं?
डाइनामाइट न्यूज से बातचीत में ग्राम प्रधान के संभावित उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने भी तारीखों की घोषणा न होने से खासी निराशा जतायी। जनता का कहना है कि ग्रामीण विकास को चरणबद्ध तरीके से जारी रखने के लिये समय पर चुनाव जरूरी है। कार्यकाल खत्म होने के बाद कई तरह के विकास कार्य ठप्प पड़ गये हैं, ऐसे में सरकार को चाहिये कि जल्द से जल्द चुनाव कराये।
Published : 8 January 2021, 3:32 PM IST
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