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नई दिल्ली: पूरी दुनिया समेत आम आदमी कोरोना महामारी के कहर से जूझ रहा है। दुनिया में अब तक लाखों बेगुनाह लोगों को मौत की नींद सुलाने और करोड़ों लोगों को संक्रमित करने वाले इस खतरनाक वायरस को लेकर कई सवालों के जबाव मिलने अभी भी बाकी है। लगभग डेढ़ साल पहले अस्तित्व में आये कोविड-19 वायरस को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस खतरनाक वायरस की उत्पत्ति कैसे हुई? पूरी दुनिया और वैज्ञानिक इस सवाल का जबाव तलाश रहे हैं लेकिन अब तक कोई खास सफलता नहीं मिल सकी। लेकिन अब एक नई स्टडी में कुछ अहम तथ्य सामने आये हैं, जिसमें चीन खलनायक के रूप में सामने आ रहा है।
चीन की वुहान लैब में बना कोरोना?
कोरोना वायरस को लेकर सामने आई एक नई स्टडी में यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस चीन की वुहान लैब में ही बना था। चीन की इस लैब पर पहले से ही शक किया जाता रहा है। लेकिन अब नयी स्टडी से इससे संबंधित तथ्य और भी पुख्ता हो गये हैं। ताजा स्टडी के मुताबिक कोरोना वायरस को इसी लैब में तैयार किया गया।
जोड़ा गया चमगादड़ कनेक्शन
नई स्टडी में यह भी कहा गया है कि वुहान लैब में जब चीन ने इस तैयार किया और इसने दुनिया में कहर बरपाना शुरू किया तो तब रिवर्स इंजीनियरिंग के दम पर उसे ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि ये वायरस एक चमगादड़ की वजह से बना है। मतलब इसे प्राकृतिक बताने की कोशिश चीन द्वारा की जाने लगी। जबकि स्टडी के मुताबिक यह मैन मैड वायरस ही है। यानि इसे इंसानों द्वारा ही बनाया गया है और चीन ने इसको लेकर सबसे बड़ी खलनायकी की है।
नई स्टडी में सामने आया धोखा
डेलीमेल यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश प्रोफेसर एंगुस और नॉर्वे के वैज्ञानिक डॉ. बर्जर ने अपनी स्टडी में पाया है कि चीन ने कोरोना को छुपाने के लिए रेट्रो इंजीनियरिंग के कागज़ तैयार किए और दुनिया को पूरी तरह धोखे में रखा गया।
वैज्ञानिकों को दिखे कुछ फिंगरप्रिंट्स
स्टडी में बताया गया है कि पिछले साल कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन बनाने के दौरान वैज्ञानिकों को कुछ फिंगरप्रिंट्स दिखे, जो वायरस में थे। जिसने ये संकेत दिए कि वायरस किसी लैब से आया है। वैज्ञानिक तभी अपनी इस बात को छापना चाहते थे, लेकिन कई बड़े संस्थानों ने इनकार कर दिया और चमगादड़ वाली थ्योरी को ही सही बताने की कोशिश की गई।
वुहान लैब के कर्मचारी अस्पताल में भर्ती
अब इस नई स्टडी से चीन और उसके वुहान लैब की भूमिका और संदिग्ध हो गई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सार्वजनिक रुप से कोरोना के ओरिजन की जांच की बात कही है, तब दुनिया के कई देश इस ओर रुख कर रहे हैं। व्हाइट हाउस को दी गई एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नंवबर 2019 में वुहान लैब के कुछ कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती किया गया था, जिनमें कोरोना के लक्षण थे। उसके कुछ वक्त बाद ही कोरोना ने दुनिया में तबाही मचाना शुरू किया था।
इस इंटेलिजेंस रिपोर्ट के बाद जो बाइडेन ने इस वायरस की उत्तपत्ति को लेकर जांच में तेजी लाने के आदेश दिये। अब कई देश तेजी से इसकी जांच में जुट गये हैं और उम्मीद जतायी जा रही है कि अब चीन का काला चेहरा सबके सामने जल्द उजागर होगा।
Published : 31 May 2021, 2:00 PM IST
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