
सीकर: खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) भगवान श्रीकृष्ण के कलियुग अवतार माने जाते हैं और इनकी महिमा अपार है। इनका प्रमुख मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू गांव में है, जिसे खाटू श्याम मंदिर कहा जाता है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार मान्यता है कि जो भक्त जय 'श्री श्याम' का सच्चे मन से जाप करता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
जानकारी के अनुसार खाटू श्याम में 12 दिनों तक चलने वाला लक्खी मेला 28 फरवरी से शुरू होने वाला है। खाटू श्याम में लक्खी मेले की तैयारी पूरी हो गई है।
मंदिर में फाल्गुन महीने में लगने वाला खाटू श्याम मेला बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं। निशान यात्रा भी बहुत महत्वपूर्ण होती है, जिसमें भक्त पैदल यात्रा करके मंदिर में ध्वजा (निशान) चढ़ाते हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवादाता के अनुसार, खाटू श्याम में लगने वाले लक्खी मेला में पैदल श्रद्धालुओं के लिए 17 किलोमीटर तक कारपेट बिछाया गया है। भक्तों को कोई परेशानी ना हो इसका पूरा ध्यान रखा गया है। जयपुर से रींगस तक हाईवे के किनारे कच्चा रास्ता तैयार किया गया है, इससे हादसे पर रोक लगेगी बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
भीड़ को देखते हुए खाटू श्याम मेला मैदान से मंदिर तक पहुंचने के लिए 8 किलोमीटर का जिगजैग रास्ता बनाया गया है। श्रद्धालुओं को जिगजैग रास्ते से दर्शन के लिए आगे बढ़ना होगा. जिगजैग रास्ते को टीन शेड से कवर किया गया है। बाबा श्याम के दर्शन में काफी वक्त लग सकता है।
सरकारी प्रोटोकॉल वाले VIP के दर्शन होंगे
सरकारी प्रोटोकॉल वाले वीआईपी के दर्शन होंगे। दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए अलग लेन रहेगी, जिससे उन्हें कोई परेशानी न हो। मंदिर से करीब 250 मीटर दूर लाला मांगेराम धर्मशाला के पास ही बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए अलग लाइन बनाई जा रही है।
वहीं पैदल चलने में असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए व्हील चेयर की व्यवस्था रहेगी। 16 आपातकालीन गेट बनाए गए हैं ।
श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक का रास्ता वन-वे रहेगा। सीकर-रींगस रोड पर मंडा मोड़ के आस-पास छोटे वाहनों के लिए बड़ी पार्किंग की व्यवस्था डेवलप की गई है।
इमरजेंसी हॉस्पिटल बनाया गया है
लखदातार ग्राउंड के पास इमरजेंसी हॉस्पिटल बनाया गया है। किसी की तबियत खराब होने पर आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
मेले के दौरान खाटू श्याम से दिल्ली के लिए सेमी डीलक्स बस चलेंगी। 7 मार्च से 12 मार्च तक और पूरा महीने चलेगा।
घटोत्कच के पुत्र थे बर्बरीक
पौराणिक कथा के अनुसार इनका असली नाम बर्बरीक था, जो महाभारत के महान योद्धा और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्होंने श्रीकृष्ण को यह वचन दिया था कि वे युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। चूंकि पांडवों को विजय दिलाना सुनिश्चित था, श्रीकृष्ण ने उनकी शक्ति देखकर उनसे उनका सिर दान में मांग लिया।
बर्बरीक ने सहर्ष शीश दान कर दिया। श्रीकृष्ण ने उनके बलिदान से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि कलियुग में तुम "श्याम" नाम से पूजे जाओगे और जो भी सच्चे मन से तुम्हें याद करेगा, उसकी मनोकामना पूर्ण होगी।
Published : 27 February 2025, 11:46 AM IST
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