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कासगंज: जनपद की तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र में वैसे तो श्रद्धालु रोजाना अपने-अपने परिजनों के अस्थि विसर्जन व पिंडदान आदि करने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र में सोमवार को श्रद्धा और मानवता की अनूठी मिसाल का अनोखा मामला देखने को मिला।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक मध्य प्रदेश के मंदसौर भानपूरा तहसील के खेड़ा गांव से जिले से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने गांव में बुजुर्ग बैलों की मृत्यु के बाद उनका सनातन संस्कृति के अनुसार क्रियाक्रम किया। उसके बाद श्रद्धालुओं ने बैलों के पिंडदान व श्राद्ध कर्म किया।
श्रद्धालुओं ने बताया कि वे गांव पहुंचकर अब बैलों की तेरहवीं कराएंगे और अपने गांव में 03 हजार लोगों को भोज कराएंगे।
मध्य प्रदेश के मंदसौर से पिंडदान करने तीर्थ नगरी सोरों पहुंचे भवानी सिंह ने बताया कि वह अपने बैलों को पिछले 30 वर्ष से अपने खेती बाड़ी आदि में सहयोग ले रहे थे।
डाइनामाइट न्यूज़ से बातचीत में उन्होंने बताया कि वृद्धावस्था में दोनों बैलों माना और श्यामा की मौत हो गई। दोनो बैल हमारे परिजनों की तरह थे और अपने माता-पिता की तरह उन्हें हमने संरक्षण दिया। उनके मरने के बाद हमारा कर्तव्य बनता है कि हम उनका हिंदू रीति रिवाज से मृतक होने के बाद जो संस्कार किया जाता है उसे करें।
भवानी सिंह ने अपने माना और श्याम नाम के बैलों का सोरों जी कुंड में विधि विधान से पिंडदान व दान पुण्य किया। उनके तीर्थ पुरोहित उमेश पाठक ने हरि की पौड़ी वराह घाट के निकट उन बैलों का पिंडदान और विधि विधान से क्रिया कर्म कराया।
तीर्थ पुरोहित उमेश पाठक ने बताया सनातन धर्म में जिस तरीके से मनुष्यों के क्रिया कर्म करने का विधान है जिस तरीके से भगवान श्री राम ने अपने पिता के मित्र जटायू पक्षी का दाह संस्कार क्रिया कर्म किया था उसी तरीके से हमारे यजमान तीर्थ पुरोहितों ने मध्य प्रदेश से आकर सोरोंजी कुंड में दोनों बैलों माना और श्याम का पिंडदान श्राद्ध कर्म किया है।
Published : 25 December 2023, 3:45 PM IST
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