बजट 2020: विपक्षी नेताओं ने दी प्रतिक्रिया, कही ये बड़ी बात...

डीएन ब्यूरो

आम बजट से आम आदमी से लेकर हर वर्ग के लोगों को उम्मीदें होती है। लोग मानकर बैठे थे कि वित्त मंत्री के पिटारे से ऐसी योजनाएं बाहर आएंगी, जिनकी उन्हें उम्मीद है। बजट पेश होने के बाद विपक्षी नेताऔं की प्रतिक्रिया भी अलग-अलग आई। किसी ने सराहा तो किसी ने कहा बजट में कुछ खास नहीं है। डाइनामाइट न्यूज पर जानिएं किसने कहा क्या क्या...

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण  बजट  पेश  करते हुए
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करते हुए

नई दिल्ली: आम बजट 2020 पेश होने के बाद सत्ता पक्ष जहां इसे ऐतिहासिक बताकर अपनी पीठ थपथपा रहा है तो वहीं विपक्ष बजट को निराशाजनक बताकर सरकार पर निशाना साध रहा है आम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बजट 2020-21 को सरकार की खोखली बातों का पिटारा करार देते हुए कहा है कि इसमें लंबे भाषण तथा भ्रम की स्थिति पैदा करने वाली बातें हैं और देश के युवाओं एवं अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए कुछ भी ठोस व्यवस्था नहीं है।

लेकिन कांग्रेस सांसद और पूर्व मंत्री शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा है कि इस बजट से देश के मध्यम वर्ग को थोड़ी राहत मिली है. थरूर ने नए टैक्स छूट (Tax Deduction) पर कहा कि इससे आम मध्यम वर्ग को थोड़ी राहत मिलेगी। हालांकि पूरे बजट से वह ज्यादा खुश नजर नहीं आए। 

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद में पेश वर्ष 2020-21 के बजट को दीवालिया सरकार का दीविालिया बजट करार देते हुए आज कहा कि गिरती अर्थव्यवस्था, बेतहाशा बढी महंगाई और रोजगार के बारे में कोई ठोस कदम उठाने की बात बजट में नहीं की गयी है।

यादव ने संसद परिसर में बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश की खराब अर्थव्यवस्था को देखते हुए देशवासियों को बजट से बहुत सारी उम्मीदें थी लेकिन लोगों को निराशा हाथ लगी है। इस बजट से गरीबों, किसानों और नौजवानों के जीवन में कोई परिवर्तन नहीं आने वाला है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि इसमें लोगों की दिक्कतें दूर करने के लिए कुछ नहीं किया गया। उन्होंने ट्वीट किया सिर्फ बेकार की बातें और जुमले हैं। इसमें लोगों की दिक्कतें दूर करने, बढ़ती बेरोजगारी, गांवों में मजदूरी भुगतान संकट, परेशान किसानों की आत्महत्या करने जैसी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं है।
 

 

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