जब लाइव मैच में कान में ईयरपीस लगाकर उतरे क्रोनिए-डोनाल्ड, गांगुली की चालाकी से खुला राज

1999 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मैच के दौरान साउथ अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए और एलन डोनाल्ड कान में ईयरफोन लगाकर मैदान पर उतरे थे। सौरव गांगुली की शिकायत के बाद अंपायरों ने इसे हटवाया, लेकिन नियमों के अभाव के कारण उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 23 June 2026, 10:20 AM IST
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New Delhi:  क्रिकेट के मैदान पर हमेशा से ही बाहरी टेक्नोलॉजी या गैजेट्स के इस्तेमाल को प्रतिबंधित किया जाता रहा है ताकि खेल की पारदर्शिता बनी रहे और सट्टेबाजी या मैच फिक्सिंग जैसी अनैतिक गतिविधियों को बढ़ावा न मिले। यही वजह है कि खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के मोबाइल फोन मैच शुरू होने से पहले ही जमा करा लिए जाते हैं। हाल ही में टी20 लीग के दौरान डगआउट में फोन के इस्तेमाल पर बड़ा बवाल भी देखने को मिला था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्रिकेट इतिहास में एक ऐसा दौर भी था जब कप्तान खुद कान में खुफिया ईयरफोन लगाकर फील्डिंग करने उतर गया था?

15 मई 1999: वर्ल्ड कप के मैदान पर वो अजीबोगरीब वाकया

यह ऐतिहासिक और हैरान कर देने वाला वाकया 15 मई 1999 को भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेले गए वर्ल्ड कप मैच के दौरान हुआ था। जब साउथ अफ्रीका की टीम फील्डिंग के लिए मैदान पर उतरी, तो कप्तान हैंसी क्रोनिए और तेज गेंदबाज एलन डोनाल्ड के कानों में एक छोटा सा ईयरपीस (ईयरफोन) लगा हुआ था। इसके जरिए ड्रेसिंग रूम में बैठे उनके कोच बॉब वूल्मर लाइव मैच के दौरान मैदान पर सीधे निर्देश दे रहे थे।

सौरव गांगुली ने भांप ली 'चाल' और मच गया हड़कंप

शुरुआत में भारतीय बल्लेबाजों का ध्यान इस पर नहीं गया, लेकिन टीवी कमेंटेटर्स ने इसे स्क्रीन पर नोटिस किया। जल्द ही सचिन तेंदुलकर के साथ ओपनिंग कर रहे सौरव गांगुली की पैनी नजरें क्रोनिए के कान पर गईं। गांगुली ने तुरंत भांप लिया कि कुछ गड़बड़ है और उन्होंने बिना देर किए मैदानी अंपायरों से इसकी शिकायत की। इसके बाद मैच को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा।

अंपायरों के पास नहीं था नियम, क्यों बच गए क्रोनिए?

गांगुली की शिकायत के बाद अंपायरों ने मैच रेफरी तलत अली से बात की और उन्होंने आईसीसी (ICC) से संपर्क किया। उस वक्त क्रिकेट के नियमों की किताब में ऐसा कोई नियम ही नहीं था जो खिलाड़ियों को मैदान पर ईयरपीस पहनने से रोकता हो। हालांकि, इसे खेल भावना के विपरीत (अनुचित लाभ) माना गया। ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान मैच रेफरी खुद मैदान पर आए और उन्होंने दोनों खिलाड़ियों से ईयरपीस हटाने को कहा। नियम न होने के कारण ही दोनों दिग्गजों पर कोई जुर्माना या बैन नहीं लगा।

कोच वूल्मर का 'अमेरिकन स्पोर्ट्स' वाला आइडिया

कोच बॉब वूल्मर का मानना था कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है, क्योंकि वे केवल तकनीकी मदद दे रहे थे। उन्होंने अमेरिकी खेलों (जैसे अमेरिकन फुटबॉल) से प्रेरित होकर यह प्रयोग किया था। इससे पहले उन्होंने वॉर्म-अप मैचों में भी इसका इस्तेमाल किया था, जहां किसी का ध्यान नहीं गया था। लेकिन बाद में जब हैंसी क्रोनिए खुद मैच फिक्सिंग के बड़े विवाद में फंसे, तब इस ईयरपीस वाले फैसले को रोकने के कदम को बेहद सही माना गया।

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टी20 लीग का प्लेऑफ नियम

 क्रिकेट में निरंतरता बनाए रखने के लिए समय-समय पर प्रयोग होते रहे हैं। जैसे टी20 लीग में साल 2011 से पहले प्लेऑफ (क्वालीफायर और एलिमिनेटर) की व्यवस्था नहीं थी, जो बाद में टीमों को अंत तक लड़ने का मौका देने और ब्रॉडकास्टर्स के फायदे के लिए लागू की गई।

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आईसीसी का नया सख्त नियम

इस घटना के ठीक बाद आईसीसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए मैदान पर किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन डिवाइस (ईयरफोन, स्मार्टवॉच, फोन) के इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था।

Location :  New Delhi

Published :  23 June 2026, 10:20 AM IST

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