
अमेठी में तैयार हो रही AK-203 राइफल
New Delhi: भारत और रूस के बीच मेक इन इंडिया के तहत साझेदारी ने एक नई दिशा दिखाई है। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने यूपी के कोरबा प्लांट में AK-203 राइफल के निर्माण के लिए साझा संयंत्र का उद्घाटन किया था। इस परियोजना के तहत करीब 6 लाख राइफलों का निर्माण किया जा रहा है। अब तक 48,000 राइफलों की आपूर्ति भारतीय सेना को की जा चुकी है।
नए 'शेर' के नाम से पहचान
जब इस राइफल में 100 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा, तो इसे ‘शेर’ के नाम से जाना जाएगा। वर्तमान में, इस राइफल में 50 प्रतिशत स्वदेशी मटेरियल है, और दिसंबर 2025 तक इसे पूरी तरह स्वदेशी बना दिया जाएगा। एके-203 की स्वदेशी रेंज को लेकर बहुत उम्मीदें हैं, क्योंकि यह राइफल भारतीय सैनिकों की ताकत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
AK-203 राइफल की विशेषताएं
AK-203 एक 7.62x39 मिमी असॉल्ट राइफल है, जिसका वजन सिर्फ 3.6 किलोग्राम है। यह राइफल 800 मीटर तक सटीक निशाना लगा सकती है और एक मिनट में 700 राउंड फायर कर सकती है। इसके अलावा, फायरिंग रेंज और क्वालिटी कंट्रोल लैब में परीक्षण करते समय, यह देखा गया कि एके-203 15,000 राउंड फायर कर चुकी राइफल भी पूरी तरह से कार्यशील है। अधिकारियों के अनुसार, यह राइफल 40,000 राउंड तक फायरिंग कर सकती है।
भारत और रूस की पहली प्राइवेट कंपनी: IRRPL
भारत और रूस ने इस राइफल के निर्माण के लिए इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) नामक कंपनी का गठन किया है। यह कंपनी पूरी तरह से भारतीय सेना के नियंत्रण में है, जिसमें एक वरिष्ठ भारतीय सेना अधिकारी, मेजर जनरल एस के शर्मा, कंपनी के सीईओ हैं। इस कंपनी का उद्देश्य मेक फॉर द वर्ल्ड के तहत राइफलों का निर्यात करना भी है।
2025 तक सेना को पूरी डिलीवरी
मेजर जनरल शर्मा के अनुसार, दिसंबर 2030 तक, 6 लाख AK-203 राइफलों की डिलीवरी पूरी कर दी जाएगी, जो कि निर्धारित समय से 22 महीने पहले होगी। इसके साथ ही, एके-203 की दूसरी राइफल और UBGL ग्रेनेड लॉन्चर के निर्माण का भी लक्ष्य रखा गया है।
केरल पुलिस ने भी किया टेंडर जारी
भारतीय सेना के अलावा, अब राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सुरक्षा बलों में भी AK-203 राइफल को खरीदने की होड़ मच गई है। हाल ही में केरल पुलिस ने एके-203 राइफल खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। यह राइफल न केवल सेना बल्कि पुलिस बलों के लिए भी एक उत्कृष्ट हथियार साबित हो सकती है।
अमेठी के कोरबा प्लांट में रोजाना 600 राइफल्स का निर्माण
कोरबा प्लांट का लक्ष्य हर साल 70,000 राइफलों का निर्माण करना है, यानी प्रति दिन 600 राइफल्स। इस प्लांट में 550 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से 12 रूसी विशेषज्ञ और 90 प्रतिशत भारतीय हैं। इन राइफलों के निर्माण में स्वदेशी तकनीक और कौशल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भारत की रक्षा इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है।
एके-203 की ताकत और भविष्य
AK-203 राइफल भारतीय सेना की ताकत का नया प्रतीक बनने जा रही है। इसकी सटीकता, विश्वसनीयता और ऊंची फायरिंग क्षमता के कारण यह राइफल सैनिकों के लिए एक शक्तिशाली उपकरण साबित होगी।
Location : New Delhi
Published : 20 July 2025, 2:10 PM IST
Topics : AK 203 AK 203 Rifle Indian Army IRRPL Korba plant