Vat Purnima Vrat 2026: इस दिन रखा जाएगा वट पूर्णिमा का व्रत, आर्थिक तंगी दूर करने के लिए जरूर करें कौड़ियों का यह टोटका

साल 2026 में वट पूर्णिमा व्रत की तारीख को लेकर उलझन में हैं? जानें सही डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त, बरगद के पेड़ की परिक्रमा का महत्व और आर्थिक संकट व कर्ज से मुक्ति के लिए ज्योतिषाचार्य के बताए खास उपाय

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 June 2026, 11:40 AM IST

New Delhi: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए वट पूर्णिमा का व्रत रखती हैं। साल 2026 में इस व्रत की तारीख को लेकर महिलाओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि व्रत 29 जून को रखा जाए या 30 जून को। अगर आप भी इस उलझन में हैं, तो आइए ज्योतिषीय गणना के अनुसार इसकी बिल्कुल सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त जानते हैं।

उदयातिथि से दूर हुई तारीख की उलझन

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून 2026 को तड़के सुबह 03:06 बजे हो जाएगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे होगा। सनातन धर्म में उदयातिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को सर्वोपरि माना जाता है। चूंकि 30 जून को सूर्योदय पूर्णिमा तिथि में हो रहा है, इसलिए वट पूर्णिमा का व्रत और पूजा 30 जून 2026, मंगलवार को ही मान्य होगी।

पूजा का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त

30 जून को व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पूजा का एक बेहद सीमित लेकिन बेहद शुभ समय मिल रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन वट वृक्ष (बरगद) की पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 08:55 बजे से लेकर सुबह 10:40 बजे तक रहेगा। सुहागिनों को इसी समय अवधि के भीतर अपनी पूजा संपन्न कर लेनी चाहिए।

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अखंड सौभाग्य के लिए वट वृक्ष की 108 परिक्रमा

वट पूर्णिमा के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए बरगद के पेड़ की विशेष पूजा करती हैं। इस दिन ठीक वट अमावस्या की तरह ही बरगद के पेड़ में सूती धागा लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा लगाने का विधान है। पूजा के समय बरगद के पेड़ पर भिगोया हुआ काला चना, गेहूं, केला, मौसमी फल और लाल रंग का कपड़ा चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। एस्ट्रोलॉजर नीतिका शर्मा के अनुसार, इस विधि से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि के रास्ते कभी बंद नहीं होते।

स्नान-दान और पितृ तर्पण का महत्व

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पवित्र जल का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा जी या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि नदी स्नान संभव न हो तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद अपने पितरों की आत्मा की शांति और सद्गति के लिए तर्पण जरूर करें।

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कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति के अचूक उपाय

यदि आप लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं या आप पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, तो पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का यह उत्तम अवसर है। इस दिन मां लक्ष्मी को पीले रंग की 11 कौड़ियां अर्पित करें। यदि पीली कौड़ियां न मिलें, तो सफेद कौड़ियों पर हल्दी का तिलक लगाकर अर्पित किया जा सकता है। इसके अलावा, वट पूर्णिमा की रात को किसी सरोवर, नदी या पास के राधा-कृष्ण मंदिर में दीपदान अवश्य करें। मान्यता है कि इससे जीवन का अंधकार दूर होता है और खुशियां दस्तक देती हैं।

Location :  New Delhi

Published :  20 June 2026, 11:40 AM IST