
घर की दिशा और किस्मत का सीधा कनेक्शन (Img- AI)
New Delhi: वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार (मेन एंट्री) को सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। घर का मुख्य दरवाजा सिर्फ लोगों के आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यह घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का माध्यम भी बनता है। यदि मुख्य द्वार सही दिशा में हो तो परिवार में समृद्धि आती है, लेकिन गलत दिशा में बना दरवाजा जीवन में तमाम परेशानियां और मानसिक तनाव खड़ा कर सकता है।
इंटीरियर वास्तु प्लानर और कंसलटेंट रानी टिबड़ेवाल के अनुसार गृहक्षतिया मुख्य द्वार की एक ऐसी एंट्री मानी जाती है, जिसे मिश्रित परिणाम देने वाला लेकिन काफी शुभ माना गया है। जिन घरों में यह एंट्री होती है, वहां रहने वाले लोगों का समाज में वर्चस्व और प्रतिष्ठा बढ़ती है।
यह दिशा परिवार के सदस्यों के भीतर साहस, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करती है। यदि आपके घर में यह स्थिति है, तो व्यापार और कार्यक्षेत्र में और अधिक वृद्धि के लिए वहां 'इंद्राणी यंत्र' स्थापित करना बेहद लाभदायी साबित होता है।
दूसरी ओर, यम एंट्री यानी दक्षिण दिशा (South Entry) का मुख्य द्वार वास्तु में अशुभ माना जाता है। इस दिशा से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, जिससे बनते काम बिगड़ने लगते हैं और परिवार में बेवजह का तनाव छाया रहता है। इतना ही नहीं, यम द्वार के कारण सदस्यों में किसी बड़ी बीमारी या अनहोनी का भय भी बना रहता है।
यदि आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा (यम स्थान) में है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। वास्तु शास्त्र में इसके अचूक उपाय बताए गए हैं। इस दोष को समाप्त करने के लिए प्रवेश द्वार पर 'महामृत्युंजय यंत्र' की स्थापना अवश्य करनी चाहिए। इसके साथ ही, मेन एंट्री के पास तुलसी का पौधा रखें और रोज शाम को वहां एक दीपक जलाएं। यह छोटा सा उपाय नकारात्मक शक्तियों को दूर कर घर में सुख-शांति लाता है।
Location : New Delhi
Published : 21 July 2026, 1:19 PM IST