
सावन में हरी चूड़ियां पहनने के खास नियम (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: प्रकृति की हरी-भरी चादर और शिव भक्ति के उल्लास के बीच एक बार फिर सुहागिनों के श्रृंगार का सबसे बड़ा दौर शुरू होने जा रहा है। इस साल श्रावण मास की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से हो रही है। सावन का यह पवित्र महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है, क्योंकि चारों तरफ फैली हरियाली और सुहाने मौसम के बीच भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। इस खास महीने में महिलाओं द्वारा हाथों में हरी चूड़ियां पहनना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में हरी चूड़ियां पहनना समृद्धि, भक्ति, आपसी सद्भाव और भगवान शिव व माता पार्वती के दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। पारंपरिक रूप से इनका संबंध खुशहाली, बेहतर वैवाहिक जीवन और आपसी तालमेल से जुड़ा हुआ है। इस पवित्र मास में महिलाएं देवी-देवताओं की पूजा के दौरान विशेष रूप से हरी चूड़ियों का श्रृंगार करती हैं।
सावन के महीने में हरी चूड़ियां पहनने के लिए कुछ खास दिनों को बेहद शुभ माना गया है-
सावन का पहला सोमवार: इस पवित्र दिन पर हरी चूड़ियां पहनना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
शुक्रवार का दिन: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार को प्रेम संबंध, मधुरता और दांपत्य जीवन का कारक माना गया है, इसलिए इस दिन भी चूड़ियां पहनना उत्तम होता है।
पूजा के बाद का नियम: महिलाओं को सावन माह में स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए और उसके बाद ही श्रद्धापूर्वक हरी चूड़ियां धारण करनी चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं को सीधे बाजार से लाकर या डिब्बे से निकालकर तुरंत हरी चूड़ियां नहीं पहननी चाहिए। इन्हें पहनने से पहले भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष अर्पित करना बेहद जरूरी है। पूजा-अर्चना करने के बाद भगवान से अपने सुहाग और परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगें और फिर पूरी निष्ठा के साथ इन्हें अपने हाथों में पहनें।
सावन के पूरे महीने के दौरान महिलाओं को कुछ छोटी लेकिन बेहद जरूरी बातों का खास ख्याल रखना चाहिए-
टूटी या चटके चूड़ियां न पहनें: यदि सावन के दौरान कोई चूड़ी टूट जाए या उसमें क्रैक आ जाए, तो उसे तुरंत सम्मानपूर्वक उतार देना चाहिए और उसकी जगह नई हरी चूड़ियां पहन लेनी चाहिए।
अन्य सुहाग चिन्हों का सम्मान: सावन मास में हरी चूड़ियों के साथ-साथ सुहाग से जुड़े अन्य प्रतीकों जैसे मंगलसूत्र, सिंदूर, बिंदी और बिछिया का भी पूरा सम्मान करना चाहिए।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, केवल सुहागिनें ही नहीं बल्कि अविवाहित लड़कियां भी श्रावण मास के दौरान हरी चूड़ियां पहन सकती हैं। सनातन संस्कृति में हरे रंग को सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और प्रकृति की उत्पत्ति का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा, इस रंग को माता पार्वती के आशीर्वाद से जोड़कर भी देखा जाता है, जिससे कुंवारी कन्याएं भी इसे श्रद्धा के साथ धारण कर सकती हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। डाइनामाइट न्यूज़ इस लेख में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है।
Location : New Delhi
Published : 27 July 2026, 3:32 PM IST