सिर्फ रेशम का धागा नहीं, सदियों पुराना रक्षा कवच है ‘राखी’: जानिए इसके पीछे छिपी 4 पौराणिक कहानियां

28 अगस्त 2026 को रक्षा बंधन का पावन पर्व मनाया जा रहा है। जानिए माता लक्ष्मी, द्रौपदी, यमुना और इंद्राणी से जुड़ी वे 4 अनोखी पौराणिक कहानियां, जिन्होंने इस रेशमी धागे को बनाया सुरक्षा और प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 28 August 2026, 10:33 AM IST

New Delhi: हर साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। इस वर्ष 28 अगस्त 2026 को यह पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है।

इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई हर परिस्थिति में बहन की रक्षा का वचन देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह परंपरा कब और कैसे शुरू हुई?

पाताल लोक में रक्षासूत्र और मां लक्ष्मी का वचन

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपने पाताल लोक का द्वारपाल बना लिया था। अपने पति को वापस लाने के लिए मां लक्ष्मी ने एक गरीब स्त्री का रूप धरा और पाताल लोक पहुंचकर राजा बलि की कलाई पर राखी बांधी। बलि ने जब बहन को उपहार मांगने को कहा, तो मां लक्ष्मी ने अपने वास्तविक रूप में आकर भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ ले जाने की अनुमति मांग ली।

द्रौपदी का साड़ी का पल्लू और श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा

महाभारत काल में जब श्रीकृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से घायल हो गई थी, तब द्रौपदी ने बिना सोचे अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी कलाई पर बांध दिया था। श्रीकृष्ण ने इस प्रेम के बदले द्रौपदी को हर संकट में रक्षा का वचन दिया और चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर भाई धर्म निभाया।

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यमुना का आदर और यमराज का वरदान

एक अन्य कथा के अनुसार, सावन पूर्णिमा के दिन ही यमुना जी ने अपने भाई यमराज को आदरपूर्वक घर बुलाकर मस्तक पर तिलक लगाया और हाथ में रक्षासूत्र बांधा। यमराज ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि इस दिन जो भी बहन अपने भाई को रक्षासूत्र बांधेगी, उसे किसी भी भय से मुक्ति मिलेगी।

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देवराज इंद्र और इंद्राणी का विजय सूत्र

भविष्य पुराण में उल्लेख मिलता है कि जब असुरों के साथ युद्ध में देवता पराजित होने लगे, तब इंद्राणी (शची) ने देवगुरु बृहस्पति के कहने पर इंद्रदेव की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। इसी सुरक्षा धागे के प्रभाव से देवताओं को युद्ध में विजय प्राप्त हुई थी।

Location :  New Delhi

Published :  28 August 2026, 9:59 AM IST