Parama Ekadashi 2026: तीन साल बाद आने वाली परमा एकादशी का महासंयोग, जानिए क्यों है यह व्रत इतना खास और फलदायी

परमा एकादशी 2026 में 11 जून को मनाई जाएगी, जो अधिकमास में आने वाली विशेष एकादशी है। मान्यता है कि इस व्रत से दरिद्रता दूर होती है और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व विस्तार से।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 May 2026, 1:04 PM IST

New Delhi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। सामान्य रूप से एक वर्ष में 24 एकादशी होती हैं, लेकिन जब पंचांग में अधिकमास जुड़ता है तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। इन्हीं विशेष परिस्थितियों में अधिकमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत लगभग तीन वर्ष में केवल एक बार आता है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

परमा एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त 2026

पंचांग के अनुसार इस वर्ष अधिकमास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 11 जून 2026 को सुबह 12 बजकर 57 मिनट पर होगी। वहीं यह तिथि उसी दिन रात 10 बजकर 36 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदयातिथि के आधार पर परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, दिन बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत का पालन करेंगे।

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परमा एकादशी का धार्मिक महत्व

‘परमा’ शब्द का अर्थ सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अत्यंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत करने पर सोने के दान और अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। यह व्रत जीवन में दरिद्रता, आर्थिक संकट और पापों के नाश के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान कृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत का महत्व बताते हुए कहा था कि जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करता है, उसे मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है।

परमा एकादशी पूजा विधि

परमा एकादशी के दिन श्रद्धालुओं को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद मंदिर या घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

पूजा के दौरान भगवान को पीले फूल, ऋतु फल, धूप, दीप और पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रीहरि को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाया जाता है। इस भोग में तुलसी दल का होना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि इसके बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते।

इसके बाद श्रद्धालु व्रत कथा का श्रवण या पाठ करते हैं और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की आरती करते हैं। इस दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व बताया गया है, इसलिए भक्त पूरी रात जागकर भजन-कीर्तन करते हैं।

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व्रत में ध्यान रखने योग्य बातें

परमा एकादशी के दिन चावल का सेवन पूर्ण रूप से वर्जित माना गया है। साथ ही इस दिन क्रोध, झूठ और परनिंदा से दूर रहकर मन को पूरी तरह सात्विक रखना चाहिए। व्रत के दौरान भगवान विष्णु के सहस्रनाम का पाठ या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है।

व्रत पारण और समापन विधि

अगले दिन व्रत खोलने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और दान-दक्षिणा देना आवश्यक माना गया है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है और इस प्रकार परमा एकादशी का व्रत पूर्ण होता है।

Disclaimer: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। डाइनामाइट न्यूज़ इस लेख में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है।

Location :  New Delhi

Published :  21 May 2026, 1:04 PM IST