Apara Ekadashi 2026: धन और मोक्ष देने वाली अपरा एकादशी, आज से तिथि शुरू, 13 मई को रखा जाएगा व्रत, जानें नियम

अपरा एकादशी 2026 की तिथि 12 मई दोपहर 2:52 से शुरू होकर 13 मई दोपहर 1:29 तक रहेगी, व्रत 13 मई को रखा जाएगा। इस व्रत को धन, सुख और मोक्ष देने वाला माना जाता है। व्रत में नियमों का पालन जरूरी है।

Updated : 12 May 2026, 11:37 AM IST
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New Delhi: ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अपरा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। स्कंद पुराण के अनुसार यह व्रत व्यक्ति को सभी कष्टों से मुक्ति दिलाकर भगवान विष्णु के धाम तक पहुंचाने वाला बताया गया है। यह व्रत धन, समृद्धि, सफलता और सुख-शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त श्रद्धा से इस व्रत को करता है उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

तिथि कब से कब तक रहेगी प्रभावी

पंचांग के अनुसार अपरा एकादशी 2026 की तिथि 12 मई को दोपहर 2 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 13 मई 2026 को दोपहर 1 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी। हालांकि व्रत का पालन परंपरागत रूप से सूर्योदय से शुरू होकर अगले दिन पारण तक किया जाता है। इसी कारण व्रत मुख्य रूप से 13 मई को रखा जाएगा।

व्रत की अवधि और नियम

एकादशी व्रत लगभग 24 घंटे का माना जाता है। व्रत रखने वाले भक्तों को तिथि शुरू होने के बाद ही संयम और नियमों का पालन शुरू कर देना चाहिए। दशमी तिथि की रात से ही हल्का भोजन करना उचित माना जाता है ताकि व्रत के समय शरीर में अन्न का अवशेष न रहे।

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व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें

अपरा एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है। इस दिन झूठ बोलना, निंदा करना और किसी का अपमान करना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान मानसिक और शारीरिक शुद्धता बनाए रखना चाहिए।

दूध से बनी चीजों का सेवन किया जा सकता है, लेकिन पनीर, छेना या उससे बनी वस्तुओं का सेवन वर्जित बताया गया है। मान्यता है कि पनीर बनाने की प्रक्रिया में दूध की पवित्रता भंग होती है, जिससे दोष उत्पन्न होता है। इसी प्रकार भैंस और बकरी के दूध का सेवन भी इस दिन वर्जित माना गया है, केवल गाय का दूध ही ग्रहण करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यता और ज्योतिषीय कारण

वैदिक ज्योतिष के अनुसार केतु और चंद्रमा के बीच शत्रुता मानी जाती है। इसी कारण नींबू और दूध के मिश्रण से बनने वाले पदार्थों को व्रत में अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसे पदार्थों के सेवन से व्रत का फल प्रभावित हो सकता है। इसी कारण एकादशी के दिन इन नियमों का पालन आवश्यक माना गया है।

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पूजा मुहूर्त और पारण समय

अपरा एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 32 मिनट से 8 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। व्रत का पारण 14 मई 2026 को किया जाएगा। पारण का समय सुबह 5 बजकर 31 मिनट से 8 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। वहीं द्वादशी तिथि का समापन उसी दिन सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर होगा।

Disclaimer: यहां दी गई सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि डाइनामाइट न्यूज़ किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।

Location :  New Delhi

Published :  12 May 2026, 11:37 AM IST

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