जन्माष्टमी 2026 की तारीख को लेकर है कंफ्यूज? जानें मथुरा-वृंदावन में कब मनेगा कान्हा का जन्मोत्सव

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 में 4 सितंबर को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग के साथ मनाई जाएगी। जानें मथुरा-वृंदावन में जन्मोत्सव की सही तिथि, मध्यरात्रि पूजा का 46 मिनट का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का पूरा धर्मशास्त्रीय समय।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 30 August 2026, 3:37 PM IST

New Delhi: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर इस साल भक्तों के बीच किसी तरह का असमंजस नहीं है। वर्ष 2026 में जन्माष्टमी का पावन पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को पूरे देश में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

इस बार की जन्माष्टमी बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग एक साथ बन रहा है। 4 सितंबर को रात 2:25 बजे से अष्टमी तिथि शुरू होगी, वहीं रोहिणी नक्षत्र भी रात 12:29 बजे से लग जाएगा, जिससे यह जन्मोत्सव धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी और शुभ बन रहा है।

निशीथ काल में 46 मिनट का विशेष पूजा मुहूर्त

कान्हा के जन्मोत्सव पर मध्यरात्रि (निशीथ काल) की पूजा का सबसे बड़ा महत्व होता है। वृंदावन के पंचांगीय गणना के अनुसार, 4 सितंबर की रात 11:56 बजे से 5 सितंबर की रात 12:41 बजे तक निशीथ पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा।

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भक्तों को बाल गोपाल का पंचामृत अभिषेक, नए वस्त्र व श्रृंगार, माखन-मिश्री का भोग लगाने और आरती करने के लिए करीब 46 मिनट का स्वर्णिम समय मिलेगा।

मथुरा-वृंदावन में जन्मोत्सव की भव्य तैयारियां

कान्हा की जन्मभूमि मथुरा और बाल लीलाओं की नगरी वृंदावन में जन्माष्टमी का अलग ही उल्लास देखने को मिलेगा। दोनों ही जगहों पर मुख्य जन्मोत्सव 4 सितंबर की रात को ही मनाया जाएगा।

वृंदावन के सुप्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में महाभिषेक के बाद देर रात 2 बजे से विशेष मंगला आरती और दर्शन का सिलसिला शुरू होगा, जो तड़के तक चलेगा। इसके अगले दिन यानी 5 सितंबर को मंदिरों में पारंपरिक 'नंदोत्सव' की धूम रहेगी।

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कब और कैसे खोलें जन्माष्टमी का व्रत?

जन्माष्टमी व्रत पारण को लेकर पंचांग के अनुसार 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने पर व्रत खोलना अति उत्तम माना गया है। हालांकि, कई स्थानों पर निशीथ काल में जन्मोत्सव पूजा और आरती के तुरंत बाद भी पारण करने की लोक परंपरा है। श्रद्धालु अपनी स्थानीय कुल परंपरा के अनुसार पारण कर सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  30 August 2026, 3:35 PM IST