फाल्गुन अमावस्या 2026 पर जानें किन कामों से बचना चाहिए और कौन से उपाय करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। अमावस्या की रात के शुभ-अशुभ कार्य, दान-पुण्य और पूजा विधि की पूरी जानकारी पढ़ें।

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New Delhi: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है, लेकिन फाल्गुन अमावस्या का स्थान विशेष होता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों की शांति, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और आध्यात्मिक साधना के लिए किए गए उपाय जल्दी फल देते हैं। पूजा-पाठ, दान और संयम से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की रात कुछ कार्यों से विशेष रूप से बचना चाहिए। माना जाता है कि इन गलतियों से मानसिक अशांति, आर्थिक बाधाएं और पारिवारिक तनाव बढ़ सकता है।
फाल्गुन अमावस्या की रात न करें ये काम
1. सुनसान स्थानों पर न जाएं: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या की रात ऊर्जा का प्रभाव अधिक संवेदनशील होता है। इस दौरान श्मशान, खंडहर या एकांत स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। इसे अशुभ माना जाता है।
2. तामसिक भोजन से दूरी रखें: इस दिन शुद्ध सात्विक भोजन करना बेहतर माना जाता है। मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ऐसा न करने पर पितृ दोष या नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है।
3. देर रात तक जागने से बचें: बिना कारण देर रात तक जागना मानसिक थकान और तनाव बढ़ा सकता है। इस रात शांत मन से ध्यान, जप या भजन करना अधिक शुभ माना जाता है।
4. घर में क्लेश न करें: अमावस्या पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन वाद-विवाद या बड़ों का अपमान करना अशुभ समझा जाता है। पारिवारिक शांति बनाए रखना ही इस दिन का मुख्य संदेश है।
5. संयम का पालन करें: शास्त्रों में इस तिथि पर ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम का पालन करने की सलाह दी गई है। इससे मन की एकाग्रता और आध्यात्मिक शक्ति मजबूत होती है।
शुभ फल पाने के लिए क्या करें?
1. पीपल के नीचे दीपक जलाएं: शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से पितरों की कृपा मानी जाती है।
2. दान-पुण्य करें: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या काले तिल का दान करना लाभकारी माना जाता है।
3. हनुमान चालीसा का पाठ: यदि अमावस्या मंगलवार को पड़े तो हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
आध्यात्मिक और मानसिक लाभ
फाल्गुन अमावस्या आत्मचिंतन का भी अवसर है। इस दिन ध्यान, प्रार्थना और सकारात्मक संकल्प लेने से मानसिक शांति मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन पुराने नकारात्मक प्रभावों को छोड़कर नई शुरुआत करने का संकेत देता है। अमावस्या की रात को अनुशासन, शांति और श्रद्धा के साथ बिताना ही सबसे बड़ा उपाय माना गया है।