Navratri 2026: चैत्र नवरात्र की नवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना से जीवन में आएंगे सुख और समृद्धि, जानें आज का दिन क्यों है खास?

चैत्र नवरात्र की नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन सच्चे मन से आराधना करने से जीवन में सुख, समृद्धि, सफलता और सभी बाधाओं का निवारण होता है। धार्मिक मान्यता है कि बिना महानवमी की पूजा और कन्या पूजन के नवरात्र का पारण अधूरा रहता है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 27 March 2026, 11:12 AM IST

New Delhi: चैत्र नवरात्र 2026 की महानवमी आज यानी 27 मार्च को मनाई जा रही है। इसे रामनवमी के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन इसी दिन होता है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि बिना महानवमी की पूजा और कन्या पूजन के नवरात्र का पारण अधूरा रहता है।

नवमी का महत्व

महानवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए विशेष दिन माना जाता है। यह देवी भक्तों को सिद्धियां और मनचाहा फल प्रदान करती हैं। कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर पूरे नवरात्र की साधना का फल मिलता है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। नवरात्र के अंतिम दिन इस स्वरूप की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

Chaitra Navratri 2026: छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें विधि और बाधाओं को दूर करने के उपाय

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त?

द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च यानी कल सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर आज सुबह 10:06 बजे तक थी। इस तिथि में कन्या पूजन का शुभ समय सुबह 6:17 बजे से लेकर 10:08 बजे तक था। इस समय में कन्याओं की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

इस बार का विशेष संयोग

इस बार महानवमी का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इन योगों में किए गए पूजा-पाठ से दोषों का निवारण होता है और जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस दिन किए गए उपासना और कन्या पूजन का महत्व और भी बढ़ जाता है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि

मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए सुबह स्नान के बाद देवी के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए। पूजा में फूल, फल, मिठाई या नौ प्रकार के भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद 'ऊं ह्रीं दुर्गाय नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। पूजा के पश्चात प्रसाद को पहले जरूरतमंदों में बांटें और फिर स्वयं ग्रहण करें।

Magh Gupt Navratri 2026: 19 जनवरी से शुरू होगी माघ गुप्त नवरात्रि, जानें घटस्थापना मुहूर्त, नियम और महत्व

कन्या पूजन कैसे करें?

मां की पूजा के बाद कन्या पूजन किया जाता है। इसके लिए छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनका सम्मान करें। उनके पैर धोकर तिलक लगाएं और भोजन कराएं। इस दिन हलवा, पूरी और चने का विशेष प्रसाद बनाना शुभ माना जाता है। कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी बैठाया जाता है, जिसे भैरव का रूप माना जाता है। भोजन के बाद उन्हें उपहार और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का स्वरूप माना जाता है और हर उम्र का अलग महत्व है। इन कन्याओं की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, रोग दूर होते हैं और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 27 March 2026, 11:12 AM IST