Adhik Maas Ekadashi 2026: तीन साल बाद आया पुण्य कमाने का महामौका, अधिकमास में पड़ेंगी ये दो विशेष एकादशियां; नोट करें डेट

Adhikmas Ekadashi 2026: साल 2026 के अधिकमास में पद्मिनी और परमा एकादशी का बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानिए इन दोनों विशेष एकादशियों की सही तारीख, पौराणिक महत्व और दरिद्रता दूर करने के लिए इस दौरान किए जाने वाले खास उपाय

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 June 2026, 1:25 PM IST

New Delhi: हिंदू धर्म में अधिकमास जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है, को अध्यात्म और पुण्य की दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना गया है। हालांकि इस पूरे महीने में शादी-ब्याह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक होती है, लेकिन पूजा-पाठ के लिए यह समय वरदान की तरह है। इस मास में किए गए जप, तप, दान और व्रत का फल आम दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।

हर तीन वर्ष में एक बार आने वाला अधिकमास इस साल 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहने वाला है। चूंकि यह पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इसमें आने वाली एकादशी तिथियों का महत्व सबसे बड़ा माना जाता है। इस बार अधिकमास में दो बेहद खास और दुर्लभ एकादशियां पड़ रही हैं, जो भक्तों के जीवन से हर तरह के कष्टों को दूर कर सकती हैं।

ज्येष्ठ अधिक मास में बन रहा है दो विशेष एकादशियों का संयोग

चूंकि इस साल अधिक मास ज्येष्ठ के महीने में लगा है, इसलिए इस दौरान पड़ने वाली शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (एकादशी) पर व्रत रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, अधिकमास के दौरान केवल दो ही विशेष एकादशियां आती हैं- पद्मिनी एकादशी और परमा एकादशी। यह अद्भुत संयोग हर तीन साल में सिर्फ एक बार ही भक्तों को मिलता है। आइए जानते हैं कि इस साल ये दोनों व्रत कब रखे जाएंगे और इनका क्या विशेष महत्व है।

Parama Ekadashi 2026: तीन साल बाद आने वाली परमा एकादशी का महासंयोग, जानिए क्यों है यह व्रत इतना खास और फलदायी

1. पद्मिनी एकादशी व्रत (27 मई): आर्थिक संकटों से मिलेगी मुक्ति

अधिकमास की पहली एकादशी को 'पद्मिनी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। इस साल यह व्रत ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यानी 27 मई को रखा जा चुका है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पद्मिनी एकादशी का व्रत रखना हजारों अश्वमेध यज्ञ करने के समान पुण्य फल देता है।

जो श्रद्धालु इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु के सामने 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करते हैं, उनके जीवन से पैसों की तंगी और आर्थिक परेशानियां हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं। साथ ही, इससे पारिवारिक कलह शांत होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

2. परमा एकादशी व्रत (11 जून): मिट जाएगी दरिद्रता, मिलेंगे 'परम' सिद्धियों के वरदान

पद्मिनी एकादशी के बाद, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष में दूसरी एकादशी पड़ेगी, जिसे 'परमा एकादशी' कहा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 11 जून को रखा जाएगा। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी भक्तों को 'परम' सिद्धियां, ऐश्वर्य और सुख प्रदान करने वाली मानी गई है।

ऐसी मान्यता है कि परमा एकादशी का व्रत करने से गंभीर से गंभीर दरिद्रता और पुरानी आर्थिक तंगी का नाश होता है। इस दिन व्रत रखने से इंसान के जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप कट जाते हैं। शास्त्रों में इस दिन पूजा के साथ-साथ 'पंचदान' यानी स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौदान करने का विशेष महत्व बताया गया है।

एकादशी के साथ अधिकमास में जरूर करें ये 5 आसान काम

यदि आप इन दोनों एकादशियों और पुरुषोत्तम मास का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो इस दौरान ये पांच काम अवश्य करें:

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नियमित आराधना: प्रतिदिन सुबह-शाम भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करें।

तुलसी सेवा: घर के आंगन में मौजूद तुलसी के पौधे के पास रोजाना घी का दीपक जलाएं।

महादान: अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों और गरीबों को अन्न, जल, फल और मिट्टी के घड़े का दान करें।

सात्विक जीवन: इस पूरे महीने मांसाहार और तामसिक भोजन का पूरी तरह त्याग कर केवल शुद्ध और सात्विक आहार लें।

धार्मिक पाठ: अधिकमास के दिनों में नियमित रूप से भगवद्गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना सबसे उत्तम और शुभ माना जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  4 June 2026, 1:25 PM IST