पंजाब में DA पर आर-पार: हाई कोर्ट का चाबुक, सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार, जानें 7.5 लाख कर्मचारियों के हक का पूरा सच

पंजाब के 7.5 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स का 18% बकाया DA विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट के सख्त आदेश और 8 सितंबर की महाहड़ताल की चेतावनी के बीच जानिए क्या है पंजाब का 25 हजार करोड़ रुपये का यह पूरा मामला।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 2 September 2026, 10:38 AM IST

Chandigarh: पंजाब के करीब 7.5 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA/DR) को लेकर राज्य सरकार और कर्मचारियों के बीच का तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। कर्मचारियों को जहां 18 प्रतिशत बकाया डीए मिलने की उम्मीद है, वहीं सरकार 25 हजार करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम वित्तीय बोझ से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है। यह विवाद अब केवल वेतन-भत्ते की लड़ाई न रहकर पंजाब के प्रशासनिक और कानूनी ढांचे की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।

अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच दोहरे मापदंड पर भड़का गुस्सा

कर्मचारी संगठनों का मुख्य विरोध डीए के असमान वितरण को लेकर है। वर्तमान में पंजाब में कार्यरत आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और न्यायिक अधिकारियों को 58 प्रतिशत डीए मिल रहा है, जबकि बाकी सभी राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को मात्र 42 प्रतिशत पर ही सीमित रखा गया है।

कर्मचारियों का तर्क है कि जब एक ही राज्य में बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को बढ़ा हुआ डीए दिया जा सकता है, तो तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।

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हाई कोर्ट के आदेश और सरकार की मजबूरी

मामला अदालत पहुंचने पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच और बाद में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने कर्मचारियों के हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने सरकार को 15 दिनों के भीतर पूरा बकाया भुगतान करने और 31 अगस्त 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया था।

साथ ही तय समय सीमा बीतने पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लगाने की चेतावनी भी दी थी। हालांकि, खस्ताहाल वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए सरकार ने डेडलाइन बीतने के बाद भी भुगतान नहीं किया।

हड़ताल की चेतावनी और दफ्तरों में ठप कामकाज का खतरा

हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी भुगतान न होने पर कर्मचारी संगठनों ने 17 अगस्त को अवमानना याचिका दायर कर दी और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। 27 अगस्त की महाहड़ताल के बाद अब यूनियनों ने सरकार को 7 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया है।

यदि कारण बताओ नोटिस वापस नहीं लिए गए और मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 8 सितंबर से सामूहिक आकस्मिक अवकाश (Mass Casual Leave) लेकर सभी सरकारी दफ्तर ठप करने और मंत्रियों के आवासों का घेराव करने का ऐलान किया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट में टिकी निगाहें, केविएट से फंसा मामला

हाई कोर्ट के झटके के बाद पंजाब सरकार ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी (SLP दायर की) है। दूसरी ओर, कर्मचारी यूनियनों ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में केविएट (Caveat) दाखिल कर रखी है, जिससे सरकार को एकतरफा राहत मिलना आसान नहीं होगा। अब देश की सबसे बड़ी अदालत ही यह तय करेगी कि कर्मचारियों को उनका हक कब मिलेगा या पंजाब सरकार को वित्तीय संकट से कोई मोहलत मिलेगी।

Location :  Chandigarh

Published :  2 September 2026, 10:38 AM IST