
लालू यादव और तेजस्वी यादव (img: social media)
Patna: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल यानी (राजद) के अंदर इन दिनों बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। विधानसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन और बांकीपुर उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी नेतृत्व ने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का फैसला लिया है। अब तेजस्वी यादव अपनी नई टीम तैयार करेंगे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बदलाव में लालू प्रसाद यादव के पुराने और करीबी नेताओं की भूमिका क्या रहेगी और क्या नई टीम में उन्हें पहले जैसा महत्व मिलेगा?
कभी सबसे बड़ी पार्टी थी RJD, अब घट गई ताकत
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी थी। बाद में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के चार विधायकों के राजद में शामिल होने के बाद पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़कर 79 हो गई थी, लेकिन पांच साल बाद राजनीतिक स्थिति पूरी तरह बदल गई। नवंबर 2025 तक राजद की विधानसभा में संख्या घटकर 25 विधायकों तक पहुंच गई। इसी बीच तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, जिससे संगठन की जिम्मेदारी उनके हाथों में और मजबूत हुई।
बांकीपुर हार के बाद पार्टी में बढ़ा मंथन
बांकीपुर उपचुनाव में राजद को मिली हार ने पार्टी के अंदर कई सवाल खड़े कर दिए। माना जा रहा था कि तेजस्वी यादव इस सीट पर पूरी ताकत लगाएंगे, लेकिन वह चुनावी मैदान में देर से सक्रिय हुए। इसका असर परिणाम पर भी दिखा और राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता अपनी जमानत तक नहीं बचा सकीं। इस हार के बाद पार्टी के भीतर और बाहर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। सोशल मीडिया पर यादव-मुस्लिम वोट बैंक में बदलाव, नेताओं की निष्क्रियता, आपसी मतभेद और लालू परिवार के अंदर मतभेद जैसी बातें चर्चा में रही। इसी दौरान राजद विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच बयानबाजी ने भी कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाने की बात कही गई।
सभी संगठनात्मक इकाइयां भंग, नई टीम बनाने की तैयारी
तेजस्वी यादव के निर्देश के बाद राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने पार्टी की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया। अब पार्टी में प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक नए सिरे से संगठन तैयार किया जाएगा। मंगनी लाल मंडल ने कहा कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले ही नई टीम बनाने की योजना थी, लेकिन चुनाव, राज्यसभा और बांकीपुर उपचुनाव के कारण बदलाव टल गया था। उन्होंने बताया कि अब पुरानी टीम के सभी पदाधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है। जिन नेताओं का प्रदर्शन बेहतर रहेगा, उन्हें दोबारा मौका दिया जा सकता है। नई टीम में युवाओं के साथ-साथ सामाजिक समीकरणों का भी ध्यान रखा जाएगा।
भाई वीरेंद्र ने उठाए तेजस्वी के करीबियों पर सवाल
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने संगठन में बदलाव के साथ तेजस्वी यादव के आसपास मौजूद कुछ लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में ऐसे लोगों को हटाने की जरूरत है जिनसे जनता नाराज है। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं की वजह से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है और नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, अब राजद को फिर से जनता के बीच जाकर भरोसा कायम करना होगा और जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को आगे लाना होगा।
मीसा और रोहिणी ने भी दिए संकेत
बांकीपुर उपचुनाव की हार पर राजद सांसद मीसा भारती ने इसे पार्टी के लिए चिंता का विषय बताया और नेतृत्व से गंभीर समीक्षा करने की बात कही। वहीं, रोहिणी आचार्य ने भी तेजस्वी यादव पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जीत उसी की होती है जो लगातार संघर्ष करता है और जनता से जुड़ा रहता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई टीम में वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं, कट्टर लालूवादियों और जमीन से जुड़े नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
नई टीम में युवाओं और सामाजिक समीकरणों पर नजर
राजद के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को मजबूत करना और पुराने जनाधार को वापस हासिल करना है। तेजस्वी यादव की नई टीम में युवा चेहरों, सक्रिय कार्यकर्ताओं और सामाजिक संतुलन को कितना महत्व मिलता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल पार्टी के अंदर बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब नजर इस बात पर है कि नई टीम में लालू प्रसाद यादव के पुराने भरोसेमंद नेताओं को जगह मिलती है या तेजस्वी यादव नई रणनीति के तहत नए चेहरों को आगे बढ़ाते हैं।
Location : Patna
Published : 9 August 2026, 1:53 PM IST