यूपी राज्यसभा चुनाव 2026: सेंधमारी में लगे सभी दल, कौन मारेगा बाजी?

यूपी राज्यसभा चुनाव में 10 सीटों के लिए सियासी गणित तेज हो गया है। एक सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट जरूरी हैं। सपा के तीसरे उम्मीदवार की संभावित एंट्री और क्रॉसवोटिंग की आशंका ने भाजपा-सपा दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 3 October 2026, 7:03 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल बढ़ा दी है। भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों की नजर ऐसे विधायकों पर है, जिनके आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर असमंजस या आशंका बताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कुछ विधायकों को राज्यसभा चुनाव में समर्थन के बदले आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट का भरोसा दिए जाने की कोशिश हो सकती है।

हालांकि, किसी दल की ओर से इस तरह के टिकट के लेनदेन की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। रिपोर्टों में इसे विधायकों को अपने पक्ष में लामबंद करने की राजनीतिक कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

37 वोटों का गणित, 10वीं सीट पर असली मुकाबला

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक विधानसभा की प्रभावी संख्या 397 है।

मौजूदा समीकरण में भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए सात सीटों पर मजबूत स्थिति में है, जबकि सपा और कांग्रेस के पास मिलकर दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है। ऐसे में असली राजनीतिक खींचतान 10वीं सीट को लेकर है।

सपा ने वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया था।

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सपा के तीसरे उम्मीदवार पर टिकी नजर

सपा के सामने सबसे बड़ा सवाल तीसरे उम्मीदवार को लेकर है। उपलब्ध संख्या के हिसाब से पार्टी को तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सपा एनडीए के कुछ असंतुष्ट विधायकों और सहयोगी दलों के कुछ विधायकों के समर्थन की संभावना तलाश रही है।

यदि सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो 10वीं सीट पर मुकाबला सीधे तौर पर और दिलचस्प हो सकता है। शुक्रवार को सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने भी तीसरा उम्मीदवार उतारने की बात कही है।

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भाजपा भी रख रही विधायकों पर नजर

दूसरी ओर भाजपा के सामने चुनौती अपने मौजूदा संख्या बल को बनाए रखने की है। पिछले राज्यसभा चुनाव में सपा के कुछ विधायकों की क्रॉसवोटिंग के बाद भाजपा उम्मीदवार संजय सेठ की जीत हुई थी। इस बार सपा की सक्रियता को देखते हुए भाजपा भी अपने विधायकों और सहयोगी दलों के विधायकों के समर्थन को लेकर सतर्क है।

राजनीतिक रिपोर्टों में दोनों खेमों के बीच संभावित क्रॉसवोटिंग को लेकर निगरानी और संपर्क की कवायद का जिक्र किया जा रहा है। हालांकि, मतदान से पहले वास्तविक स्थिति बदल सकती है और अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की संख्या तथा विधायकों के रुख पर निर्भर करेगी।

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सहयोगी दलों के विधायक भी अहम

राज्यसभा चुनाव के इस गणित में भाजपा के सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। सुभासपा, अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी, आरएलडी और अन्य सहयोगी या असंबद्ध विधायकों के रुख पर भी दोनों प्रमुख दलों की नजर है।

वहीं, सपा-कांग्रेस के मौजूदा समर्थन और अतिरिक्त विधायकों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश के बीच 10वीं सीट का समीकरण लगातार बदल सकता है। रिपोर्टों में सुभासपा के कुछ विधायकों समेत अन्य विधायकों के संभावित रुख को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

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विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा बना शक्ति-परीक्षण

राज्यसभा चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भी करीब हैं। यही वजह है कि विधायकों का रुख केवल राज्यसभा की सीटों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनाव के टिकट और राजनीतिक भविष्य से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

फिलहाल भाजपा ने अपने सभी उम्मीदवारों को लेकर अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं, जबकि सपा दो उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होना है। ऐसे में आने वाले दिनों में उम्मीदवारों और समर्थन को लेकर तस्वीर और साफ होने की संभावना है।

Location :  Lucknow

Published :  3 October 2026, 7:03 PM IST