‘कथनी और करनी में फर्क क्यों?’ राहुल गांधी पर FIR होते ही भड़के पित्रोदा, संघ प्रमुख भागवत से पूछे तीखे सवाल

भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए उनका समर्थन किया है। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के मानवता और समानता वाले बयान पर भी सवाल उठाए। पित्रोदा ने देश की संस्थाओं, GDP ग्रोथ, महंगाई और हिमालयी क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी अपनी राय रखी।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 1 September 2026, 3:58 PM IST

New Delhi: भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पित्रोदा ने मोहन भागवत के 'मानवता की एकता' और सभी इंसानों की समान गरिमा वाले बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी विचारधारा की असली परीक्षा केवल उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और अमल से होती है।

उन्होंने कहा कि यदि सभी धर्मों और समुदायों के लोगों के सम्मान की बात की जाती है, तो यह भी देखना जरूरी है कि जमीनी स्तर पर समाज के अलग-अलग वर्ग खुद को कितना सुरक्षित और सम्मानित महसूस करते हैं।

मोहन भागवत के 'मानवता की एकता' वाले बयान पर उठाए सवाल

सैम पित्रोदा ने अमेरिका में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक कार्यक्रम में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया दी। मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम में कहा था कि अलग-अलग धर्मों के रास्ते भले ही अलग हों, लेकिन मानवता और सत्य एक हैं।

भागवत ने यह भी कहा था कि हर इंसान की गरिमा समान है। इसी बयान को लेकर पित्रोदा ने कहा कि केवल ऐसे विचार व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके अनुरूप व्यवहार भी होना चाहिए।

अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति पर सवाल

पित्रोदा ने कहा कि भारत में मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और बौद्ध समुदायों के लोगों से यह पूछा जाना चाहिए कि वे मौजूदा परिस्थितियों को किस नजरिए से देखते हैं। उनके अनुसार, किसी भी समाज की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल बड़े मंचों पर दिए गए बयानों से नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि एक ओर सभी लोगों के सम्मान और समानता की बात होती है, जबकि दूसरी ओर अलग-अलग घटनाओं को लेकर सवाल और विवाद सामने आते हैं। पित्रोदा ने कहा कि बातों से ज्यादा महत्वपूर्ण काम और उसका असर होता है।

RSS के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका पहुंचे थे भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संगठन के शताब्दी वर्ष से जुड़े वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय प्रवासियों, भारतीय-अमेरिकी कारोबारियों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

न्यूयॉर्क में उनके कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला। कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं ने कार्यक्रम को लेकर आपत्ति जताई थी तथा आयोजन स्थल पर कार्यक्रम रद्द करने की मांग भी उठाई गई थी।

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हल्द्वानी विवाद में राहुल गांधी के खिलाफ FIR पर बोले पित्रोदा

हल्द्वानी में शुद्धिकरण विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR पर भी सैम पित्रोदा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए उन्हें एक मजबूत और दृढ़ नेता बताया।

पित्रोदा ने दावा किया कि देश की कई संस्थाओं पर सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण का असर पड़ा है। उन्होंने न्यायपालिका, चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय और स्थानीय पुलिस समेत विभिन्न संस्थाओं की स्वतंत्र भूमिका को लेकर सवाल उठाए।

संसद के मानसून सत्र पर भी की टिप्पणी

सैम पित्रोदा ने हाल में संपन्न संसद के मानसून सत्र को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद में बहस के दौरान कई बार ऐसी स्थिति देखने को मिलती है, जब राजनीतिक दलों के बीच तीखी नोकझोंक और एक-दूसरे पर चिल्लाने की स्थिति पैदा हो जाती है।

उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रदर्शन की सराहना करते हुए दावा किया कि विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया और सरकार कई मामलों में दबाव में दिखाई दी।

7.8 फीसदी GDP ग्रोथ पर भी उठाए सवाल

सैम पित्रोदा ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत वास्तविक GDP वृद्धि दर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का मूल्यांकन केवल बड़े आंकड़ों के आधार पर नहीं होना चाहिए।

पित्रोदा के मुताबिक, यह देखना भी जरूरी है कि आर्थिक वृद्धि का वास्तविक लाभ आम लोगों तक कितना पहुंच रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विकास का फायदा व्यापक रूप से जनता को मिल रहा है या यह सीमित वर्ग तक केंद्रित है।

महंगाई और आम लोगों के खर्च का उठाया मुद्दा

पित्रोदा ने आम लोगों पर बढ़ते खर्च का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पेट्रोल, रसोई गैस, खाद्य सामग्री और किराये की बढ़ती लागत का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक विकास के आंकड़ों के साथ आम नागरिक की जीवन-यापन की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती का आकलन केवल GDP ग्रोथ से नहीं, बल्कि आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर में सुधार से भी किया जाना चाहिए।

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पहली तिमाही में GDP और GVA में दर्ज हुई वृद्धि

आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। इसी अवधि में वास्तविक GVA में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

पहली तिमाही में वास्तविक GDP का आकार 81.36 लाख करोड़ रुपये आंका गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 75.46 लाख करोड़ रुपये था। मौजूदा कीमतों पर नाममात्र GDP 88.27 लाख करोड़ रुपये रही, जिसमें 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की कही बात

सैम पित्रोदा ने आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दुनिया को केवल सत्ता और मुनाफे के दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि लोगों और पर्यावरण को भी विकास के केंद्र में रखना चाहिए।

उन्होंने नेपाल में आई बाढ़ और प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए हिमालयी क्षेत्रों में सड़कों, बांधों और अन्य बड़ी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल उठाए।

हिमालयी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव पर चिंता

पित्रोदा ने सवाल किया कि पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों से पहले पर्याप्त पर्यावरणीय अध्ययन और जोखिम मूल्यांकन किया जाता है या नहीं।

उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है, खासकर हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में, जहां प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम अधिक रहता है।

Location :  New Delhi

Published :  1 September 2026, 3:55 PM IST