Ram Govind Chaudhary Death: छात्र आंदोलन से सत्ता के शिखर तक, यूं बनी रामगोविंद चौधरी की अलग पहचान

पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी का निधन बलिया के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर जेपी आंदोलन, जेल, विधानसभा, मंत्री पद और नेता प्रतिपक्ष तक पहुंचा। करीब पांच दशक के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने संघर्ष और समाजवाद को राजनीति का आधार बनाया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 26 September 2026, 8:17 AM IST

Ballia:  पूर्व मंत्री एवं समाजवादी नेता रामगोविंद चौधरी का निधन हो गया। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन में कदम रखने वाले रामगोविंद चौधरी ने करीब पांच दशक के राजनीतिक सफर में संघर्ष, समाजवाद और जनसरोकारों को अपनी राजनीति का आधार बनाया। 9 जुलाई 1953 को जन्मे रामगोविंद चौधरी तीन भाइयों में सबसे बड़े थे।

प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय और स्कूली शिक्षा सिकंदरपुर में पूरी करने के बाद उन्होंने सतीश चंद्र कॉलेज में बीएससी में प्रवेश लिया। छात्र समस्याओं को लेकर आंदोलनों में सक्रियता के चलते उन्हें कॉलेज से निष्कासित किया गया। इसके बाद श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रवेश लिया, जहां उनकी छात्र राजनीति ने व्यापक रूप लिया।

छात्र राजनीति से जेपी आंदोलन तक

वर्ष 1972 में वे टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री और 1974 में अध्यक्ष निर्वाचित हुए। आपातकाल के दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चले जेपी आंदोलन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। वे जनपद छात्र युवा वाहिनी के सह-संयोजक रहे।

आंदोलन के दौरान उनकी गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित हुआ और टीडी कॉलेज परिसर से उन्हें गिरफ्तार किया गया। करीब 24 महीने जेल में रहने के बाद उनकी रिहाई हुई। इसी दौरान बलिया कलेक्ट्रेट में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से उनकी मुलाकात हुई, जो आगे उनके राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण रही।

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विधायक से कैबिनेट मंत्री तक का सफर

वर्ष 1977 में उन्होंने चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता। इसके बाद लगातार पांच बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। विधायक रहते उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की।

वर्ष 1991 में मुलायम सिंह यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। बाद में बाल विकास एवं पुष्टाहार, बेसिक शिक्षा, समाज कल्याण और पंचायती राज जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2012 में अखिलेश यादव सरकार में भी वे कैबिनेट मंत्री रहे।

नेता प्रतिपक्ष की भी संभाली जिम्मेदारी

वर्ष 2017 में उन्होंने बांसडीह से निर्दलीय प्रत्याशी केतकी सिंह को करीब 1,655 मतों से हराया। इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल की जिम्मेदारी मिली। शिक्षा और पंचायतों से जुड़े कई फैसलों के लिए भी उनके मंत्री कार्यकाल को याद किया जाता है।

समर्थकों ने जताया दुख

उनके निधन पर समाजवादी पार्टी के जिला प्रवक्ता सुशील कुमार पांडेय ‘कान्ह जी’ ने दुख जताया। उन्होंने इसे अपने जीवन की ऐसी व्यक्तिगत क्षति बताया, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

रामगोविंद चौधरी का सार्वजनिक जीवन छात्र आंदोलनों से शुरू होकर जेल, विधानसभा, मंत्रिमंडल और नेता प्रतिपक्ष तक पहुंचा। बलिया की राजनीति में उनका करीब पांच दशक का सफर संघर्ष और जनसरोकारों से जुड़ा रहा।

Location :  Ballia

Published :  26 September 2026, 8:17 AM IST