
भाजपा उम्मीदवा तरुण चुग (Img: X)
New Delhi: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन रिक्त सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए। खास बात यह रही कि चुनाव में मतदान की नौबत ही नहीं आई और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होते ही भाजपा की जीत तय हो गई। विधानसभा परिसर में आयोजित औपचारिक कार्यक्रम के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने भाजपा उम्मीदवारों तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपे। इसके साथ ही तीनों नेताओं के राज्यसभा पहुंचने का रास्ता साफ हो गया।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गुरुवार दोपहर तीन बजे तक केवल तीन उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में बचे थे। चूंकि रिक्त सीटों की संख्या भी तीन थी, इसलिए निर्वाचन नियमों के तहत मतदान कराने की आवश्यकता नहीं रही। ऐसे मामलों में शेष बचे उम्मीदवारों को सीधे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत भाजपा के तीनों उम्मीदवारों को विजेता घोषित कर दिया गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव का सबसे बड़ा मोड़ कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होना रहा। जांच प्रक्रिया के दौरान उनका नामांकन रद्द कर दिया गया, जिसके बाद चुनाव का पूरा समीकरण बदल गया। नामांकन निरस्त होने से पहले राजनीतिक परिस्थितियां अलग दिखाई दे रही थीं। विधानसभा में मौजूद संख्याबल के आधार पर भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के मैदान से बाहर होने के बाद मुकाबला लगभग समाप्त हो गया।
इस चुनाव में भाजपा ने अपने उम्मीदवारों के चयन के जरिए राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास किया। पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को उम्मीदवार बनाकर संगठन को महत्व दिया, जबकि पूर्व प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल को मौका देकर पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया।
वहीं महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने पिछड़ा वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति दिखाई।
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन को अपना एकमात्र उम्मीदवार बनाया था। पार्टी को उम्मीद थी कि विधानसभा में उपलब्ध संख्याबल के आधार पर वह एक सीट जीतने में सफल रहेगी। लेकिन नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस की पूरी रणनीति ध्वस्त हो गई। पार्टी ने इस फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया और पहले केंद्रीय निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया।
निर्वाचन आयोग से राहत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचाया। पार्टी का दावा है कि नामांकन निरस्त करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल हैं और इसकी न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि शीर्ष अदालत से भी कांग्रेस को तत्काल राहत नहीं मिल सकी। अब इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है।
Location : New Delhi
Published : 11 June 2026, 4:37 PM IST