राजस्थान के आदिवासी नेता का अंतरराष्ट्रीय सफर, UN के EMRIP सत्र में भाग लेने स्विट्जरलैंड रवाना होंगे रोत

गूंजेगी राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर से 'बाप' सांसद राजकुमार रोत स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के EMRIP के 19वें सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। 13 से 17 जुलाई तक होने वाले इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने जनता से जल, जंगल, जमीन और विस्थापन जैसे मुद्दों पर सुझाव मांगे हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 12 July 2026, 1:19 PM IST

Banswara: राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के आदिवासी समुदाय की आवाज़ उठाने जा रहे हैं। उन्हें स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के एक अहम मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है, जो मूल निवासियों के अधिकारों के लिए समर्पित है। यह कार्यक्रम 13 से 17 जुलाई तक होगा, जिसमें दुनिया भर के कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

सोशल मीडिया के जरिए घोषणा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए सांसद राजकुमार रोत ने बताया कि उन्हें संयुक्त राष्ट्र के EMRIP (मूल निवासियों के अधिकारों पर विशेषज्ञ तंत्र) के 19वें सत्र में भाग लेने का मौका मिला है। उन्होंने इसे सिर्फ अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि लाखों भारतीय आदिवासियों की आवाज को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का एक अहम मौका बताया।

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आम जनता से जमीनी स्तर के सुझाव

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से रखने के लिए, सांसद ने आम जनता, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों से सुझाव मांगे हैं। उन्होंने पानी, जंगल, जमीन, वन अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, भाषा, संस्कृति, संविधान और विस्थापन जैसे विषयों पर सुझाव देने की अपील की है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन मुद्दों की मजबूती से पैरवी की जा सके।

आदिवासी समुदाय में उत्साह

सांसद की घोषणा के बाद न केवल राजस्थान बल्कि मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड और अन्य आदिवासी-बहुल राज्यों में भी उत्साह की लहर दौड़ गई है। बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया पर अपने सुझाव और स्थानीय चिंताएं साझा कर रहे हैं। जिन मुख्य मुद्दों को उठाया जा रहा है, उनमें प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार, पारंपरिक संस्कृति का संरक्षण और स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देना शामिल है।

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इस दौरे को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि राजकुमार रोत का यह दौरा किसी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में महज भाग लेने से कहीं ज्यादा है, इसमें भारत के आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को वैश्विक पहचान दिलाने की क्षमता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच पर स्थानीय चिंताओं को प्रभावी ढंग से रखा जाता है, तो इससे आदिवासी अधिकारों पर हो रही चर्चा को एक नई दिशा मिल सकती है।

Location :  Banswara

Published :  12 July 2026, 1:19 PM IST