मोदी के स्वदेश लौटने के बाद भी नहीं हुई कैबिनेट की बैठक, क्या अब 6,7 सितम्बर को होगा मंत्रिमंडल में फेरबदल!

केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की चर्चाओं ने दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। नए सहयोगियों की एंट्री से लेकर मंत्रालयों की अदला-बदली और 70 साल से अधिक उम्र वाले मंत्रियों की भूमिका तक कई स्तरों पर बदलाव की अटकलें हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 3 September 2026, 12:23 PM IST

New Delhi: केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बुधवार, 2 सितंबर को कैबिनेट की बैठक नहीं हुई, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिन पहले ही बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से लौट चुके थे। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने जल संसाधन मंत्रालय के एक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इसके बावजूद कैबिनेट की बैठक का न होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

26 अगस्त की बैठक के बाद मिला बड़ा संकेत

इससे पहले 26 अगस्त को मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी, लेकिन इसके बाद कोई बड़ा फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया। हालांकि, इसी बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों को संकेत दिया कि अगली कैबिनेट बैठक में नए सहयोगी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अगली बैठक नए चेहरों के साथ हो सकती है।

सितंबर में बदलाव के लिए छोटी खिड़की

आने वाले दिनों में सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड के दौरे पर रहेंगे। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। वहीं 17 सितंबर से भाजपा का महीनेभर चलने वाला सेवा संकल्प अभियान शुरू होना है। इन कार्यक्रमों के बीच 6 और 7 सितंबर की तारीखें संभावित बदलाव के लिए अहम मानी जा रही हैं।

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कई मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा

संभावित फेरबदल में सिर्फ नए चेहरों की एंट्री ही नहीं, बल्कि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। जिन मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय या विभाग हैं, उनसे कुछ जिम्मेदारियां लेकर दूसरे नेताओं को दी जा सकती हैं। सरकार में नई पीढ़ी के नेताओं को अधिक जिम्मेदारी देने और युवाओं से संवाद की क्षमता को भी ध्यान में रखे जाने की चर्चा है।

शिक्षा मंत्रालय पर खास नजर

संभावित बदलाव में शिक्षा मंत्रालय को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि इस मंत्रालय में किसी ऐसे चेहरे को जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिसकी पहचान बौद्धिक और अकादमिक क्षेत्र में मजबूत हो। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

70 साल से ज्यादा उम्र वाले मंत्रियों पर नजर

कैबिनेट में 70 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 14 मंत्री हैं। संभावित फेरबदल में उम्र भी एक अहम कसौटी मानी जा रही है। चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की जिम्मेदारियां कम की जा सकती हैं, जबकि कुछ को संगठनात्मक भूमिका या राज्यों में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही होगा।

NDA के सहयोगी दल भी मांग रहे हिस्सेदारी

मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल का एक बड़ा पहलू सहयोगी दलों से जुड़ा है। तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बने 20 सांसदों के समूह के एनडीए में आने के बाद उन्हें सरकार में प्रतिनिधित्व देने की जरूरत बढ़ी है। इसके अलावा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सांसदों की संख्या भी जेडीयू से अधिक बताई जा रही है। एनसीपी की ओर से भी अधिक हिस्सेदारी की मांग की चर्चा है।

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सहयोगियों को साधने में मंत्रालय बन सकते हैं जरिया

एनडीए के भीतर अलग-अलग सहयोगी दलों की राजनीतिक ताकत और अपेक्षाओं के बीच मंत्रिपद का बंटवारा महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा डीएमके को लेकर भी राजनीतिक स्तर पर समीकरण साधने की चर्चा है। ऐसे में संभावित फेरबदल में सहयोगी दलों की हिस्सेदारी भी अहम भूमिका निभा सकती है।

उत्तर प्रदेश से रवि किशन का नाम चर्चा में

संभावित बदलाव को लेकर उत्तर प्रदेश पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राजनीतिक चर्चाओं में भाजपा सांसद रवि किशन का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर उनसे जुड़े मीम और चर्चाएं भी काफी देखने को मिली थीं। रवि किशन ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए इस सामाजिक वर्ग का राजनीतिक महत्व माना जाता है।

जातीय समीकरण भी बन सकता है आधार

उत्तर प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडलीय बदलाव को लेकर सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। भाजपा के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी हैं। ऐसे में केंद्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को साधने की रणनीति अपनाई जा सकती है। हालांकि रवि किशन या किसी अन्य नए चेहरे को मंत्री बनाए जाने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Location :  New Delhi

Published :  3 September 2026, 12:23 PM IST