जंतर-मंतर से विरोध का अधिकार छिनेगा? सूची से हटाने के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई टली

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर अदालत में क्या दलीलें दी गईं? NSUI ने 10 अक्टूबर की कथित हिंसा को लेकर क्या मांग उठाई है?

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 13 October 2026, 5:32 PM IST
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New Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले और प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई टल गई है। अदालत ने मामले से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर दायर याचिकाओं ने राजधानी में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर बहस तेज कर दी है।

16 अक्टूबर तक टली सुनवाई

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने मामले से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया। अदालत ने सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 तक के लिए टाल दी है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले से ही दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों और उन पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर विचार कर रहा है। इसी वजह से दोनों अदालतों में चल रही कार्यवाही के बीच संबंधित दस्तावेज पेश करना अहम हो गया है।

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जंतर-मंतर की जगह तीन वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल

जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं। प्रशासन का यह फैसला राजधानी में प्रदर्शन के लिए स्थान तय करने की व्यवस्था में बदलाव का हिस्सा है।

हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से इस फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका तर्क है कि जंतर-मंतर जैसे प्रमुख स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति खत्म होने से नागरिकों के लिए अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। इस विवाद में शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक अधिकार भी अहम मुद्दे हैं।

NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने की स्वतंत्र जांच की मांग

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित हमले के मामले में याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास प्रदर्शनकारियों के साथ बाहरी असामाजिक तत्वों ने मारपीट और हिंसा की।

NSUI की ओर से इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने या स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में कथित घटना से जुड़े सबूतों की जांच और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की मांग भी उठाई गई है। ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं; इनकी पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।

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CEC के इस्तीफे और मतदाता सूची को लेकर प्रदर्शन

दिल्ली में हालिया प्रदर्शनों के पीछे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुख रहा है। विपक्षी दलों, छात्र संगठनों, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी समूहों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े दावों पर संबंधित पक्षों के रुख को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इस पूरे विवाद के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, वैकल्पिक स्थलों की व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा जैसे सवाल अदालतों के सामने हैं।

अब 16 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने और प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले से जुड़े मामले में अगली सुनवाई पर नजर रहेगी। अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेज और याचिकाकर्ताओं की दलीलें आगे की कार्यवाही में अहम भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल, इस विवाद का केंद्र शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने का सवाल है।

Location :  New Delhi

Published :  13 October 2026, 5:32 PM IST

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