
ममता बनर्जी की TMC में महाबगावत (Img- Internet)
New Delhi: राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विलय को लेकर चल रही चर्चाएं पूरी तरह से अफवाह साबित हुई हैं। दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व ने साफ किया है कि मर्जर का ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि, दोनों दलों ने भविष्य में संभावित गठबंधन के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं। आपसी राजनीतिक हितों और साझा मुद्दों को लेकर दोनों पार्टियां लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपनी पार्टियों के बीच तालमेल को और मजबूत करने के तरीकों पर गंभीर चर्चा की है। दोनों नेता विपक्षी 'INDIA' गठबंधन की अगली अहम बैठक हैदराबाद में आयोजित करने पर सहमत हुए हैं। विलय की खबरों को खारिज करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि ये खबरें पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं।
संभावित विलय की इन चर्चाओं ने तब जोर पकड़ा जब दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की। दरअसल, टीएमसी इस वक्त अपने सबसे बड़े अंदरूनी राजनीतिक संकट से जूझ रही है। पार्टी के कई विधायक और सांसद खुलकर बगावत पर उतर आए हैं। टीएमसी को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को पार्टी और संसद सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले 8 जून को वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी राज्यसभा और टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ चुके हैं।
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टीएमसी के भीतर बगावत की आग किस कदर फैल चुकी है, इसका अंदाजा बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बयान से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 20 सांसदों के एक गुट ने लोकसभा स्पीकर को औपचारिक पत्र लिखकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है। बागी सांसदों का कहना है कि वे पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों के साथ मिलकर सकारात्मक रूप से काम करना चाहते हैं।
इस बीच, बागी गुट के प्रमुख नेता रितब्रता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस पर अपना दावा ठोकते हुए राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। उन्होंने साफ किया कि बागी गुट ही 'असली टीएमसी' है और उनकी कांग्रेस में विलय करने की कोई योजना नहीं है। रितब्रता ने दावा किया कि पार्टी के भीतर असंतुष्ट विधायकों की संख्या 58 से बढ़कर अब 64 हो गई है। बागियों को पार्टी के अधिकांश विधायकों और बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन प्राप्त है और वे तृणमूल कांग्रेस के बैनर तले ही अपनी राजनीति जारी रखेंगे।
Location : New Delhi
Published : 11 June 2026, 9:15 AM IST