अखाड़े के ‘सुल्तान’ से अदालत की ‘कटघरे’ तक; 3 साल में कैसे बदल गई कुश्ती विवाद की पूरी तस्वीर?

जंतर-मंतर आंदोलन, महिला पहलवानों के आरोप, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप, एफआईआर, राजनीति और अदालत के फैसले तक, आखिर तीन साल में बृजभूषण शरण सिंह मामले में क्या-क्या बदला? पढ़िए इस चर्चित केस की पूरी टाइमलाइन और बड़े घटनाक्रम।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 August 2026, 12:46 PM IST

New Delhi: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से शुरू हुआ देश का चर्चित विवाद अब अदालत के फैसले के बाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। करीब तीन वर्षों तक सुर्खियों में रहे इस मामले में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए। आंदोलन, एफआईआर, अदालत की सुनवाई, राजनीतिक बदलाव और खेल जगत की हलचल के बाद अब अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है।

2023 में जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन

अप्रैल 2023 में ओलंपियन और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे। महिला पहलवानों ने तत्कालीन भारतीय कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। आंदोलन की अगुवाई विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जैसे खिलाड़ियों ने की। पहलवानों की मांग थी कि बृजभूषण को गिरफ्तार कर कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाया जाए।

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सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई एफआईआर

धरना लगभग 36 दिनों तक चला और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कीं। इनमें एक मामला नाबालिग पहलवान की शिकायत से जुड़ा था, जिसमें पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी। बाद में शिकायतकर्ता के बयान बदलने पर पुलिस ने उस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। वहीं छह महिला पहलवानों की शिकायतों पर पुलिस ने आरोपपत्र भी दाखिल किया।

संसद उद्घाटन के दिन हुआ बड़ा टकराव

28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान प्रदर्शन कर रहे पहलवानों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद आंदोलन समाप्त हो गया, लेकिन कानूनी प्रक्रिया जारी रही। यह घटनाक्रम पूरे देश में चर्चा का विषय बना और खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई दी।

कुश्ती महासंघ और राजनीति में भी हुए बड़े बदलाव

दिसंबर 2023 में भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव में बृजभूषण के करीबी संजय सिंह अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास लेने की घोषणा की, जबकि बजरंग पुनिया ने अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटा दिया। बाद में खेल मंत्रालय ने नवगठित महासंघ को निलंबित भी कर दिया।

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वर्ष 2024 में भाजपा ने कैसरगंज लोकसभा सीट से बृजभूषण शरण सिंह का टिकट काटकर उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया, जो चुनाव जीतकर सांसद बने। वहीं विनेश फोगाट ने कांग्रेस का दामन थामा और हरियाणा विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनीं। बजरंग पुनिया भी कांग्रेस में शामिल हो गए।

तीन साल बाद अदालत का फैसला

करीब तीन वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलने के बाद अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया। इस फैसले के साथ देश के सबसे चर्चित खेल विवादों में शामिल इस मामले का एक अहम कानूनी अध्याय समाप्त हुआ, हालांकि यह मामला लंबे समय तक खेल, राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा का केंद्र बना रहा।

Location :  New Delhi

Published :  4 August 2026, 12:46 PM IST