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साध्या आमतौर पर हाथ से खाई जाती है। चावल और करी को मिलाकर छोटे निवाले बनाकर खाने की परंपरा है। जो व्यंजन नहीं चाहिए, उसे दोबारा परोसने से विनम्रता से मना किया जा सकता है। भोजन पूरा होने के बाद केले के पत्ते को अपनी ओर मोड़ना संतोष और भोजन की सराहना का संकेत माना जाता है। इस तरह एक केले के पत्ते पर सजा यह भोज स्वाद के साथ केरल की परंपरा, समानता और अतिथि सत्कार की कहानी भी सुनाता है। (Img: Pinterest)

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 25 August 2026, 3:33 PM IST
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Published :  25 August 2026, 3:31 PM IST

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