अगले आम चुनाव में बदल सकता है लोकसभा सीटों का गणित, महिलाओं को मिल सकता है बड़ा फायदा; जानें नया समीकरण

सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की तैयारी में है। प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटें 816 तक बढ़ सकती हैं और 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कदम महिला सशक्तिकरण और संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 24 March 2026, 11:41 AM IST

New Delhi: केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में पारित किए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में अब संशोधन की तैयारी चल रही है। इस प्रस्तावित बदलाव के तहत लोकसभा में कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की योजना है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 273 हो सकती है।

लोकसभा सीटों में बड़ा इजाफा संभव

सूत्रों के अनुसार, संशोधन के बाद लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किया जा सकता है। यह वृद्धि परिसीमन (Delimitation) के आधार पर होगी। बताया जा रहा है कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इसके तहत राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना है।

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उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर लगभग 120 हो सकती हैं, जबकि बिहार की सीटें 40 से बढ़कर 60 तक पहुंच सकती हैं। वहीं, तमिलनाडु में 39 सीटों के मुकाबले 58 या 59 सीटें होने की संभावना जताई जा रही है।

महिलाओं को मिलेगा एक-तिहाई प्रतिनिधित्व

संशोधित कानून का मुख्य उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई प्रतिनिधित्व देना है। 816 सीटों में से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इससे महिला भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि मौजूदा कानून में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को भी इसी 33 प्रतिशत आरक्षण के भीतर शामिल किया गया है, यानी अलग से अतिरिक्त कोटा नहीं दिया गया है।

राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश

इस प्रस्ताव को लेकर अमित शाह ने हाल ही में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक की। इन बैठकों में एनसीपी (एसपी), बीजेडी, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और वाईएसआर कांग्रेस के प्रतिनिधि शामिल हुए।

हालांकि, अभी तक कांग्रेस और टीएमसी जैसे प्रमुख दलों के साथ बातचीत नहीं हो सकी है। सरकार का प्रयास है कि इस संशोधन बिल पर व्यापक सहमति बनाई जाए, ताकि इसे संसद में बिना किसी बाधा के पारित किया जा सके।

दक्षिण भारत की चिंताओं को साधने की रणनीति

सीटों में प्रस्तावित वृद्धि के पीछे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कारण भी है। दक्षिण भारत के कई राज्यों और दलों का मानना रहा है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उत्तर भारत के बड़े राज्यों- जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार-को अधिक लाभ मिलेगा।

इस असंतुलन को दूर करने के लिए सीटों की कुल संख्या बढ़ाने का विकल्प चुना जा रहा है, जिससे सभी राज्यों को अनुपातिक प्रतिनिधित्व मिल सके। इससे दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं को भी कम किया जा सकता है।

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जल्द आ सकता है संशोधन बिल

सूत्रों के मुताबिक, यह संशोधन बिल 29 मार्च को संसद में पेश किया जा सकता है। साथ ही, इसी वर्ष जून में परिसीमन आयोग के गठन की संभावना भी जताई जा रही है। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो यह भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को एक नए स्तर पर ले जाने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

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  • New Delhi

Published : 
  • 24 March 2026, 11:41 AM IST