मजदूरों की जान इतनी सस्ती क्यों? हर हादसे में आखिर क्यों जा रही है श्रमिकों की जान

कहीं निर्माणाधीन इमारत गिरने से मजदूरों की मौत हो रही है, कहीं सीवर में काम करने के दौरान दीवार ढहने से श्रमिक जान गंवा रहे हैं, तो कहीं उद्योगों में सुरक्षा चूक के कारण मजदूर हादसों का शिकार बन रहे हैं। आखिर कौन है जिम्मेदार?

Updated : 8 June 2026, 8:05 PM IST

New Delhi:  कहीं निर्माणाधीन इमारत गिरने से मजदूरों की मौत हो रही है, कहीं सीवर में काम करने के दौरान दीवार ढहने से श्रमिक जान गंवा रहे हैं, तो कहीं उद्योगों में सुरक्षा चूक के कारण मजदूर हादसों का शिकार बन रहे हैं। ताजा मामला विशाखापट्टनम के एक स्टील प्लांट से सामने आया, जहां गर्म पिघला हुआ स्टील श्रमिकों पर गिरने से कई लोगों की मौत हो गई। सवाल यह है कि आखिर हर बड़े हादसे की कीमत मजदूरों को ही क्यों चुकानी पड़ती है?

सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

देशभर में लगातार सामने आ रहे इन हादसों ने कार्यस्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण स्थलों, फैक्ट्रियों और सीवर जैसी खतरनाक जगहों पर काम करने वाले मजदूर अक्सर सीमित संसाधनों और सुरक्षा उपकरणों के साथ अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। कई मामलों में शुरुआती जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, निगरानी की कमी और नियमों के पालन में लापरवाही जैसी बातें सामने आती हैं।

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हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर हादसे के बाद जांच और मुआवजे की घोषणा तो होती है, लेकिन ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जाते? आखिर क्यों बार-बार वही गलतियां दोहराई जा रही हैं? क्या मजदूरों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?

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कमजोर सुरक्षा व्यवस्था या नियमों की अनदेखी

आज हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि मजदूर काम पर जाते समय यह भरोसा भी नहीं कर पा रहे कि वे सुरक्षित घर लौट पाएंगे। एक पल की लापरवाही, कमजोर सुरक्षा व्यवस्था या नियमों की अनदेखी मिनटों में किसी परिवार का सहारा छीन लेती है।

Location :  New Delhi

Published :  8 June 2026, 8:05 PM IST