
पूर्व चीफ जस्टिस टी.एस. शिवज्ञानम (Img: Google)
Kolkata: पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव 2026 के परिणाम आने के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे स्पेशल अपीलीय ट्रिब्यूनल के प्रमुख और कोलकाता हाईकोर्ट (Kolkata High Court) के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवज्ञानम (TS Sivagnanam) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर चुनाव परिणाम आने के बाद ऐसा क्या हुआ कि न्यायमूर्ति शिवज्ञानम ने इतनी अहम जिम्मेदारी छोड़ने का फैसला कर लिया। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे में “व्यक्तिगत कारणों” का हवाला दिया है, लेकिन इस फैसले के समय ने पूरे मामले को और अधिक चर्चाओं में ला दिया है।
जानकारी के अनुसार, टी.एस. शिवज्ञानम उस तीन सदस्यीय विशेष पैनल की अगुवाई कर रहे थे जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित किया गया था। इस ट्रिब्यूनल (SIR Tribunal) का काम विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की अपीलों की निगरानी करना था।
चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने आरोप लगाया था कि उनके नाम मतदाता सूची से बिना पर्याप्त कारण हटाए गए। इसी मामले ने चुनावी माहौल को काफी संवेदनशील बना दिया था। ऐसे समय में ट्रिब्यूनल की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव खत्म होने और नतीजे आने के तुरंत बाद इस्तीफा देने से कई तरह की अटकलों को बल मिला है। हालांकि अभी तक किसी राजनीतिक दल ने इस मामले पर खुलकर टिप्पणी नहीं की है।
इसी बीच भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में तैनात दो विशेष पर्यवेक्षकों को भी उनके पदों से मुक्त कर दिया है। इनमें विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता और विशेष पुलिस पर्यवेक्षक एन.के. मिश्रा शामिल हैं।
दोनों अधिकारियों की नियुक्ति पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए की गई थी। माना जा रहा है कि राज्य में अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण चुनाव कराने में इन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस बार मतदान प्रतिशत काफी अच्छा रहा और बीते चुनावों की तुलना में हिंसा की घटनाएं भी कम देखने को मिलीं।
हालांकि इन अधिकारियों को हटाने और टी.एस. शिवज्ञानम के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
न्यायमूर्ति टी.एस. शिवज्ञानम का जन्म 16 सितंबर 1963 को हुआ था। उन्होंने चेन्नई के लोयोला कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की और बाद में मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की। उन्होंने 10 सितंबर 1986 को तमिलनाडु बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया और वरिष्ठ अधिवक्ता आर. गांधी के चैंबर से अपने कानूनी करियर की शुरुआत की।
अपने लंबे करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2000 में उन्हें अतिरिक्त केंद्रीय सरकारी स्थायी वकील नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने दक्षिणी रेलवे, केंद्र सरकार, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग जैसे कई संस्थानों के लिए वरिष्ठ पैनल वकील के रूप में काम किया।
वे राजस्व विभाग की ओर से CEGAT और CESTAT जैसे बड़े न्यायिक मंचों पर भी पेश हुए। वर्ष 2007 में मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें रजिस्ट्रार जनरल और न्यायिक अधिकारियों की ओर से पेश होने के लिए पैनल वकील नामित किया था। कानूनी क्षेत्र में उनकी साख एक सख्त लेकिन निष्पक्ष न्यायाधीश के रूप में रही है।
Location : Kolkata
Published : 8 May 2026, 8:22 AM IST