UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजों के बाद 301वीं रैंक को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बिहार के आरा और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की दो महिलाओं ने इस रैंक पर दावा किया है और दोनों का नाम आकांक्षा सिंह है। सोशल मीडिया पोस्ट, दस्तावेज और एडमिट कार्ड के क्यूआर कोड को लेकर बहस तेज हो गई है।

301वीं रैंक पर दो आकांक्षा सिंह का दावा (Img: Google)
New Delhi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम जारी होते ही एक अनोखा विवाद सामने आ गया है। सूची में 301वीं रैंक को लेकर दो अलग-अलग महिलाओं ने दावा किया है कि यह स्थान उन्हें मिला है। दोनों का नाम आकांक्षा सिंह है, जिससे पूरे मामले में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बिहार के आरा की रहने वाली आकांक्षा सिंह ने सबसे पहले यह दावा किया कि उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास करते हुए 301वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें इस बार सफलता मिलने का पूरा भरोसा था।
आकांक्षा ने बताया कि वह रोजाना लगभग 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं और इस सफलता के लिए लगातार मेहनत कर रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि उनके दादा का सपना था, जिन्हें उन पर पूरा विश्वास था।
गौरतलब है कि आरा की यह आकांक्षा सिंह प्रतिबंधित संगठन ‘रणवीर सेना’ के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह की पोती बताई जा रही हैं, जिनकी 2012 में हत्या हो गई थी।
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नतीजों के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली एक अन्य आकांक्षा सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके दावा किया कि 301वीं रैंक वास्तव में उनकी है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि उनकी पहचान और रैंक का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अपने दावे को साबित करने के लिए उन्होंने कुछ दस्तावेज भी साझा किए, जिनमें कथित तौर पर उनका पहचान पत्र और ई-समन शामिल था।
एक वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि वह पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और इस समय पटना एम्स में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि परिवार में हाल ही में एक दुखद घटना होने के कारण वह व्यस्त थीं और इसी दौरान उन्हें पता चला कि कोई और उनकी रैंक का दावा कर रहा है।
गाजीपुर की आकांक्षा ने कहा कि दोनों उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड स्कैन करने से सच्चाई सामने आ सकती है। उनका दावा है कि उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू, तीनों चरण एक ही रोल नंबर से दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ निजी चैनलों ने दोनों एडमिट कार्ड के क्यूआर कोड स्कैन किए। स्कैन करने पर जो जानकारी सामने आई, उसमें 301वीं रैंक से जुड़ा रोल नंबर गाजीपुर की उम्मीदवार के विवरण से मेल खाता बताया जा रहा है।
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दूसरी ओर आरा की आकांक्षा सिंह ने भी अपने दावे पर कायम रहते हुए कहा है कि उन्होंने उसी रोल नंबर से परीक्षा दी है, जो उनके पास मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर क्यूआर कोड में अलग नंबर दिख रहा है तो इसकी सच्चाई केवल यूपीएससी ही बता सकता है।
उन्होंने बताया कि उन्होंने ई-समन के लिए आयोग को ईमेल भी भेजा है और मामले की स्पष्टता के लिए वह दिल्ली जाकर आयोग से मुलाकात करेंगी। उनका कहना है कि पूरी जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
इस पूरे मामले ने यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के परिणामों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। फिलहाल दोनों उम्मीदवार अपने-अपने दावों पर अड़ी हुई हैं और अब अंतिम स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी आयोग पर आ गई है।