UGC नियमों पर SC में सुनवाई: क्या सामान्य वर्ग के साथ हो रहा है भेदभाव? CJI सूर्यकांत खुद करेंगे केस की समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट आज UGC के नए “भेदभाव विरोधी नियमों” को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता का दावा है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। CJI सूर्यकांत की बेंच इस मामले की समीक्षा करेगी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 29 January 2026, 10:52 AM IST

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में आज एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई होने जा रही है, जिसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए “भेदभाव विरोधी नियमों” को चुनौती दी गई है।

यह मामला मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष सूचीबद्ध है। बुधवार को इस याचिका के उल्लेख पर अदालत ने इसे तुरंत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की सहमति दी थी।

याचिकाकर्ता का दावा

याचिकाकर्ता का दावा है कि यूजीसी के नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि नियमों में ऐसे प्रावधान हैं जो सामान्य वर्ग को शिकायत दर्ज कराने या ‘संभावित पीड़ित’ के रूप में मान्यता देने से रोकते हैं।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि इससे उन्हें सामाजिक और शैक्षिक वातावरण में अन्यायपूर्ण रूप से अलग-थलग कर दिया जाएगा। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि देशभर के कई हिस्सों में इन नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, और इसे लेकर चिंता बढ़ रही है।

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अदालत ने याचिका की सुनवाई से पहले यह भी कहा कि वह वर्तमान स्थिति से परिचित है और याचिका में मौजूद तकनीकी कमियों को दूर करने के निर्देश दे सकती है। इस मामले की सुनवाई में यह देखना होगा कि क्या यूजीसी नियमों में दी गई संरचना और प्रक्रिया संविधान के समानता सिद्धांत के अनुरूप है या नहीं।

यूजीसी के नए नियम क्या कह रहे हैं?

यूजीसी के नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में “समानता समिति” (Equity Committee) का गठन अनिवार्य किया गया है। इन समितियों का उद्देश्य संस्थान में भेदभाव की शिकायतों की जांच करना, उन्हें निवारण करना और समानता को बढ़ावा देना बताया गया है। नियमों के अनुसार, इन समितियों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), महिलाएं और दिव्यांग व्यक्ति जैसे प्रतिनिधि शामिल होंगे।

इसके साथ ही, ये समितियां संस्थानों में “समावेशी और निष्पक्ष” माहौल बनाए रखने का दायित्व भी निभाएंगी।

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आलोचना और दुरुपयोग की आशंका

नए नियमों को 2012 के पुराने सलाहात्मक नियमों की जगह लाया गया है। आलोचकों का कहना है कि पुराने नियम केवल मार्गदर्शक थे, जबकि नए नियमों में अधिक कड़ाई और सख्ती है। इसके साथ ही, नियमों की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने के कारण उनके दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।

कई लोगों का यह भी कहना है कि नए ढांचे में OBC समुदाय को संभावित पीड़ित के रूप में शामिल किया गया है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को इससे बाहर रखा गया है, जिससे उन्हें “जाति आधारित भेदभाव का दोषी” मानकर निशाना बनाया जा सकता है।

देशभर में हो रहा विरोध

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में छात्रों ने नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। विरोध का मुख्य कारण यह है कि कई छात्र इसे “असमान और पक्षपाती” मानते हैं। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया है कि नए नियमों का उद्देश्य किसी के साथ भेदभाव करना नहीं है और नियमों के गलत उपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और संस्थानों की जिम्मेदारी है कि नियमों का दुरुपयोग न हो।

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Published : 
  • 29 January 2026, 10:52 AM IST