UCC के मुद्दे पर अमित शाह के सामने खड़ी हुई नई चुनौती? एनडीए सहयोगियों के सतर्क रुख से बढ़ी मुश्किलें

अमित शाह के 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू करने के एलान के बाद टीडीपी, जेडीयू और लोजपा ने सतर्क रुख अपनाया है। सहयोगियों ने साफ किया है कि इस बड़े कदम से पहले समाज के सभी वर्गों, समुदायों और संबंधित पक्षों के साथ व्यापक बातचीत होनी चाहिए और मसौदा सामने आना चाहिए।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 September 2026, 8:30 AM IST

New Delhi: देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विश्वास जताया था कि आगामी 2029 तक एनडीए शासित 21 राज्यों में UCC को लागू कर दिया जाएगा। गृह मंत्री के इस बड़े ऐलान के बाद जहां राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीन प्रमुख सहयोगी दलों- तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने इस संवेदनशील मामले पर बेहद सतर्क और नपा-तुला रुख अपना लिया है।

टीडीपी का स्पष्ट रुख: सभी पक्षों से हो बातचीत

आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी टीडीपी (TDP) ने इस मुद्दे पर साफ किया है कि फिलहाल इस विषय को लेकर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। टीडीपी संसदीय दल के नेता लवू कृष्ण देवरायालु ने कहा कि भविष्य में यदि इस पर कोई भी कदम उठाया जाता है, तो उससे पहले समाज के सभी वर्गों और संबंधित पक्षों के साथ व्यापक बातचीत की जानी बेहद जरूरी है।

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जदयू उठाएगी मुद्दा, नीतीश कुमार की पुरानी शर्त बरकरार

बिहार में बीजेपी की अहम सहयोगी पार्टी जेडीयू (JD-U) ने भी इस मामले में अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने जानकारी दी है कि वह इस पूरे विषय पर गृह मंत्री अमित शाह से जल्द ही मुलाकात करेंगे और इस पर चर्चा करेंगे।

खास बात यह है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रुख इस मामले में पहले से ही स्पष्ट रहा है। वह लगातार यह कहते आए हैं कि UCC जैसे संवेदनशील और बड़े विषय पर आगे बढ़ने से पहले देश के सभी समुदायों को विश्वास में लेकर पूरी सहमति बनाई जानी चाहिए।

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लोजपा (रामविलास) की मांग: पहले सामने आए पूरा मसौदा

चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोजपा (रामविलास) ने भी इस मुद्दे पर पूरी सावधानी बरतने का फैसला किया है। पार्टी प्रमुख चिराग पासवान का कहना है कि उनकी पार्टी देश की सांस्कृतिक विविधता के साथ-साथ संविधान द्वारा अलग-अलग समुदायों और अनुसूचित जनजातियों (ST) को प्रदान की गई व्यवस्थाओं का पूरा सम्मान करती है।

लोजपा का मानना है कि सबसे पहले UCC का आधिकारिक मसौदा जनता के सामने रखा जाना चाहिए। इसके बाद ही सभी पक्षों से विचार-विमर्श करके पार्टी इस पर अपना अंतिम रुख तय करेगी।

इस प्रकार, गृह मंत्री के बयान के बाद यह साफ नजर आ रहा है कि भले ही एनडीए सरकार UCC को लेकर गंभीर हो, लेकिन इसके सहयोगी दल इस रास्ते पर आगे बढ़ने से पहले व्यापक आम सहमति और हर वर्ग के हितों को सुरक्षित देखने की बात कह रहे हैं।

Location :  New Delhi

Published :  15 September 2026, 8:30 AM IST