
सुप्रीम कोर्ट (Img : pinterest)
New Delhi : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले 2026 के नए नियमों को लेकर केंद्र सरकार एक बार फिर विचार कर रही है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि इन नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस मामले में विद्यार्थियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता तलाशा जा रहा है। जिससे किसी भी वर्ग में असंतोष या आशंका की स्थिति पैदा न हो। केंद्र के इस रुख के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया कि सरकार यूजीसी के नए समानता नियमों की समीक्षा के लिए समिति नियुक्त करने पर विचार कर रही है।
तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार इस मुद्दे की जांच कर रही है, ताकि विद्यार्थियों की चिंताओं का समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसी भी वर्ग को असंतोष या आशंका महसूस न हो। उन्होंने अदालत में कहा, "सरकार एक समिति नियुक्त करने पर विचार कर रही है।"
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में सभी विद्यार्थियों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने युवा पीढ़ी की चिंताओं और उनके कल्याण को सबसे अहम बताया।
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केंद्र सरकार की ओर से समिति गठित करने पर विचार किए जाने की जानकारी मिलने के बाद अदालत ने संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। यह मामला अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ और इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं से संबंधित है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के 2026 के समानता नियमों पर रोक लगा दी थी। अदालत ने इनके कुछ प्रावधानों को अस्पष्ट माना था और इनके दुरुपयोग की आशंका जताई थी। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जब तक इस मामले में आगे कोई फैसला नहीं होता, तब तक यूजीसी के 2012 के समानता नियम लागू रहेंगे।
अब केंद्र सरकार की ओर से नए नियमों की समीक्षा के लिए समिति बनाने पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद इस मामले में आगे की प्रक्रिया पर सबकी नजर है।
यूजीसी के नए नियमों को लेकर विवाद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और विद्यार्थियों को सुरक्षा देने के उद्देश्य से जुड़ा है। इस मामले की शुरुआत वर्ष 2019 में दाखिल एक याचिका से हुई थी। याचिका में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए अधिक मजबूत सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई थी।
Location : New Delhi
Published : 5 November 2026, 4:38 PM IST