’45-50 हजार में कैसे रखें ड्राइवर-सुरक्षा?’, रिटायर्ड जजों के लाभ पर केंद्र से सुप्रीम कोर्ट का सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को देश भर के रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों के लिए एकसमान राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि कमेटी की कमान किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश को सौंपी जानी चाहिए।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 September 2026, 10:03 AM IST

New Delhi: देश के उच्च न्यायालयों से सेवानिवृत्त होने वाले जजों के भत्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के सामने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राज्यों के बीच रिटायर्ड जजों को मिलने वाली सुविधाओं में भारी असमानता को अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया है कि इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए बनने वाली कमेटी की कमान किसी हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को सौंपी जानी चाहिए।

अदालत की बेंच और सुनवाई की वजह

यह अहम आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। यह याचिका 'एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज ऑफ द सुप्रीम कोर्ट एंड हाई कोर्ट्स' के अध्यक्ष जस्टिस वी एस दवे द्वारा दायर की गई थी। संगठन ने अपनी शिकायत में कहा था कि देश के अलग-अलग राज्यों में पूर्व जजों को मिलने वाली सेवानिवृत्ति सुविधाएं एक समान नहीं हैं। एक राज्य में मिलने वाली सुरक्षा और ड्राइवर जैसी बुनियादी सुविधाएं दूसरे राज्य की तुलना में काफी कम या पूरी तरह भिन्न हैं, जिससे असंतोष की स्थिति बनती है।

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सरकार के प्रस्ताव पर सीजेआई की आपत्ति

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को अवगत कराया कि सरकार ने एक समिति बनाने का निर्णय लिया है। इसके प्रमुख के तौर पर सरकार ने एक पूर्व सचिव स्तर के अधिकारी का नाम तय किया था। हालांकि, इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दो टूक कहा कि इस समिति की अध्यक्षता किसी हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को ही करनी चाहिए। सरकार ने अदालत के इस सुझाव को स्वीकार करते हुए इस पर 28 सितंबर को अपना औपचारिक जवाब पेश करने की बात कही है।

महंगाई और सुविधाओं पर कोर्ट की चिंता

अदालत ने सुनवाई के दौरान कुछ राज्यों द्वारा रिटायर्ड जजों को ड्राइवर और सुरक्षा कर्मियों के लिए दी जा रही बेहद कम राशि पर हैरानी जताई। सीजेआई ने सीधा सवाल करते हुए कहा कि क्या आज के दौर में महज 45,000 से 50,000 रुपये में एक ड्राइवर और एक सुरक्षा अधिकारी रखना संभव है? सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि ड्राइवर, घरेलू सहायक, सुरक्षा, टेलीफोन, मेडिकल खर्च और यात्रा के दौरान मिलने वाला सरकारी आवास जैसी जरूरी सुविधाएं राज्यों के हिसाब से बहुत अलग हैं।

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राष्ट्रीय नीति न बनने पर खुद दखल की चेतावनी

शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि सेवानिवृत्त जजों को एक गरिमापूर्ण जीवन मिलना चाहिए। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने खुद आगे बढ़कर देश भर के लिए एक समान मानक तय नहीं किए और राज्यों के साथ मिलकर वित्तीय बोझ साझा करने का ढांचा (मैचिंग ग्रांट) तैयार नहीं किया, तो ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट को खुद हस्तक्षेप करके कमेटी का गठन करना होगा।

Location :  New Delhi

Published :  25 September 2026, 10:03 AM IST