सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बदलाव, राष्ट्रपति की मंजूरी से पांच नए जज नियुक्त, वी मोहना भी बनीं न्यायाधीश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। इनमें चार हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना शामिल हैं। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी हुई और नियुक्ति को अंतिम मंजूरी मिली है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 1 June 2026, 10:09 AM IST

New Delhi: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इनमें चार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। इस नियुक्ति के बाद देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

कौन-कौन बने सुप्रीम कोर्ट के नए जज

नियुक्त किए गए पांच नए जजों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली शामिल हैं।

इनके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना को भी सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया है। वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट में वकालत के क्षेत्र में वरिष्ठ मानी जाती हैं और अब उन्हें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति मिली है।

कॉलेजियम की सिफारिश पर हुई नियुक्ति

इन नियुक्तियों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की थी। कॉलेजियम ने 22 और 27 मई 2026 को हुई अपनी बैठकों में इन पांच नामों को सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त करने की अनुशंसा केंद्र सरकार को भेजी थी। इसके बाद केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी होने पर राष्ट्रपति ने इन नियुक्तियों को मंजूरी प्रदान की।

न्यायिक प्रक्रिया और नियुक्ति प्रणाली

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम प्रणाली भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश करते हैं और इसमें सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल होते हैं। यह प्रणाली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ी सिफारिशें तैयार करती है।

हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया एक निर्धारित प्रक्रिया ज्ञापन (MOP) के तहत होती है। इसके अनुसार, किसी भी नियुक्ति का प्रस्ताव संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा उस अदालत के दो सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों से परामर्श के बाद शुरू किया जाता है।

इसके बाद यह प्रस्ताव राज्य के मुख्यमंत्री को भेजा जाता है, जो इसे राज्यपाल के पास भेजते हैं। राज्यपाल इसे आवश्यक दस्तावेजों के साथ केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय को भेजते हैं। इसके बाद केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई करती है।

अंतिम अनुमोदन और राष्ट्रपति की भूमिका

केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह प्रस्ताव भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास जाता है। मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों से परामर्श के बाद इसे अंतिम रूप देते हैं। कॉलेजियम की मंजूरी के बाद यह सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी जाती है।

नियुक्ति तभी प्रभावी होती है जब भारत के राष्ट्रपति नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर करते हैं। इसके बाद विधि एवं न्याय विभाग द्वारा इसकी अधिसूचना भारत के राजपत्र में जारी की जाती है।

Location :  New Delhi

Published :  1 June 2026, 10:06 AM IST