सऊदी अरामको का बड़ा फैसला: भारत को कच्चे तेल की सप्लाई रोकी, जानिए देश पर क्या पड़ेगा असर

सऊदी अरामको ने ड्रोन हमले के बाद भारत को कच्चे तेल की सप्लाई रोकी। जानिए क्या भारत में गहराएगा पेट्रोल-डीजल का संकट या बढ़ेगी महंगाई। पढ़ें सऊदी की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद होने की पूरी इनसाइड स्टोरी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 September 2026, 9:53 AM IST

New Delhi: सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण 1,200 किलोमीटर लंबी 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' (East-West Pipeline) पर हुए भीषण ड्रोन हमलों के बाद विश्व राजनीति और वैश्विक तेल बाजार में बड़ा भूचाल आ गया है। इस हमले में पाइपलाइन के मुख्य पंपिंग स्टेशनों को भारी नुकसान पहुंचा है।

सुरक्षा कारणों से सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने इस पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और भारत सहित दुनिया के कई अन्य देशों को अनुबंधों (Term Contracts) के तहत की जाने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति को अगले आदेश तक रोक दिया है।

होर्मुज और लाल सागर में तनाव से बिगड़े हालात

मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) के समुद्री मार्गों में स्थिति पहले से ही बेहद संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर (Red Sea) के रास्तों पर चल रहे तनाव के कारण सऊदी अरब इसी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को तेल भेजने के मुख्य वैकल्पिक रास्ते के रूप में इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन अब इस रास्ते के ठप पड़ जाने से भारतीय रिफाइनरियों के लिए सऊदी से तय समय पर तेल पाना मुश्किल हो गया है। भारत के कुल तेल आयात में सऊदी अरामको की हिस्सेदारी करीब 9% से 16% के बीच रही है।

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क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कमी होगी?

जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश में पेट्रोल और डीजल खत्म हो जाएगा? जानकारों का कहना है कि भारत में तत्काल कोई भौतिक तेल संकट (Physical Shortage) पैदा नहीं होगा। भारत का कच्चा तेल आयात नेटवर्क बेहद मजबूत और विविध है।

भारत के पास रूस, इराक, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से तेल खरीदने के बेहतर विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, दूसरे देशों से तुरंत (स्पॉट मार्केट) तेल खरीदने और लंबे समुद्री मार्गों से माल मंगवाने के कारण जहाजों का भाड़ा (Freight Rates) और तेल की कुल लागत काफी बढ़ जाएगी।

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स्पॉट कार्गो से राहत, लेकिन जेब पर पड़ेगा सीधा असर

राहत की बात यह है कि सऊदी अरब ने पूरी तरह से सप्लाई बंद नहीं की है। उसने कुछ 'स्पॉट कार्गो' ट्रेडर्स को बेचे हैं, जिन्हें ओमान के रास्ते भारत तक पहुंचाया जा रहा है, लेकिन इसके लिए भारत को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतों और रूसी तेल पर डिस्काउंट कम होने के कारण भारतीय रिफाइनरियों पर चौतरफा वित्तीय दबाव बढ़ गया है। यदि यह व्यवधान लंबा खींचता है, तो आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई बढ़ सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  19 September 2026, 9:53 AM IST