लाल बहादुर शास्त्री स्मारक व्याख्यान: पूर्व CJI DY चंद्रचूड़ बोले- भूखे रहकर राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बने थे शास्त्री

नई दिल्ली में आयोजित 32वें लाल बहादुर शास्त्री स्मारक व्याख्यान कार्यक्रम में देश के प्रति उनके बलिदान और नेतृत्व की विरासत पर विचार-विमर्श किया, साथ ही डिजिटल नैतिकता और जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंताएं भी जताईं।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 25 April 2026, 7:24 PM IST
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नई दिल्ली: पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री को समर्पित 32वां स्मारक व्याख्यान राष्ट्रीय संग्रहालय में आयोजित किया गया, जिसमें देश की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं। इन हस्तियों ने शास्त्री जी की अमर विरासत और आधुनिक समय में उसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने शास्त्री जी के सादगी, ईमानदारी और निर्णायक नेतृत्व के आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने अपने अहम फैसलों के ज़रिए देश की मज़बूत नींव रखी और नैतिक शासन के लिए हमेशा एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई।

व्यक्तिगत बलिदान पर आधारित नेतृत्व

1965 की चुनौतियों को याद करते हुए चंद्रचूड़ ने कहा कि युद्ध के समय भोजन की कमी के दौर में शास्त्री जी ने खुद मिसाल बनकर नेतृत्व किया। नागरिकों से पहले खुद बलिदान देने के लिए कहने की बजाय उन्होंने खुद उपवास रखकर इसकी शुरुआत की, जिससे पूरे देश में एक प्रेरणादायक लहर दौड़ गई। इसके बाद एक सामूहिक आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें परिवारों ने अपनी मर्ज़ी से भोजन छोड़ना शुरू कर दिया। यह साझा ज़िम्मेदारी और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बन गया।

उन्होंने "जय जवान, जय किसान" नारे के स्थायी प्रभाव पर भी ज़ोर दिया और कहा कि इस नारे ने सैनिकों और किसानों को भारत की ताकत और आत्मनिर्भरता के केंद्र में ला खड़ा किया। संकट के क्षणों में शास्त्री जी ने नागरिकों को उनकी सहनशक्ति का भरोसा दिलाया और उन लोगों में फिर से आत्मविश्वास जगाया जो अभी भी पिछली मुश्किलों से उबरने की कोशिश कर रहे थे।

परिवार और आयोजकों की ओर से श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्री जी को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। सुनील शास्त्री और अनिल शास्त्री ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए उनके अनुशासित जीवन और जनसेवा के प्रति उनके अटूट समर्पण को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि शास्त्री जी अपने पीछे कोई भौतिक संपत्ति नहीं छोड़ गए, बल्कि ईमानदारी, विनम्रता और राष्ट्रीय कर्तव्य पर आधारित एक ऐसी विरासत छोड़ गए जो हमेशा अमर रहेगी।

बदलती दुनिया में डिजिटल नैतिकता

समकालीन चुनौतियों पर बात करते हुए चंद्रचूड़ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि डिजिटल क्षेत्र के तेज़ी से विस्तार के कारण नैतिक ज़िम्मेदारी पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि किफायती इंटरनेट की सुविधा से लाखों लोगों को फायदा हुआ है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि डेटा का गलत इस्तेमाल निजता (privacy) के लिए खतरा बन सकता है और कमज़ोर तबकों को निशाना बना सकता है।

परमाणु तकनीक से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि नए आविष्कार रचनात्मक और विनाशकारी—दोनों ही उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, इसलिए अब और भी मज़बूत सुरक्षा उपायों और कानूनी ढांचों की ज़रूरत है।

जलवायु परिवर्तन: एक बढ़ती हुई चिंता

पूर्व CJI ने जलवायु परिवर्तन को भी एक अत्यंत ज़रूरी मुद्दा बताया और कहा कि इसका हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर साफ-साफ असर दिखाई दे रहा है। जोशीमठ और वायनाड जैसे क्षेत्रों में मौसम की चरम घटनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय बदलाव पहले से ही समुदायों और आजीविका को प्रभावित कर रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जलवायु परिवर्तन का बोझ आने वाली पीढ़ियों पर भारी पड़ेगा, इसलिए समय पर कार्रवाई करना बेहद ज़रूरी है।

Location :  New Delhi

Published :  25 April 2026, 6:51 PM IST

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