
राजनाथ सिंह दिवाली पर जाएंगे शेरथांग
New Delhi: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस बार दिवाली का त्योहार सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों के साथ मनाएंगे। इसके लिए उन्होंने सिक्किम के शेरथांग युद्ध स्मारक को चुना है। यह वही इलाका है, जहां 1967 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच भीषण संघर्ष हुआ था। नाथू ला और चो ला में हुई इन झड़पों के दौरान भारतीय सैनिकों ने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का डटकर मुकाबला किया और उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। करीब 60 साल पुरानी इस सैन्य घटना की यादें आज भी भारतीय सेना के शौर्य और साहस की गवाही देती हैं।
रक्षा मंत्री ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने कार्यक्रम की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दीपावली की पूर्व संध्या पर वह दार्जिलिंग के बागडोगरा एयरफील्ड और सिलीगुड़ी के सुकना में भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद 8 नवंबर यानी दीपावली के दिन वह सिक्किम के शेरथांग युद्ध स्मारक पहुंचेंगे।
राजनाथ सिंह ने लिखा, 'आज, दीपावली की पूर्व संध्या पर मैं दार्जिलिंग में बागडोगरा एयरफील्ड और सुकना (सिलीगुड़ी) में भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात करके उनसे बातचीत करूंगा।'
उन्होंने आगे कहा कि दीपावली के दिन शेरथांग युद्ध स्मारक जाकर देश की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस दौरान वह क्षेत्र में तैनात सैनिकों से भी मुलाकात कर उनसे संवाद करेंगे।
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सिक्किम के गंगटोक जिले में नाथू ला दर्रे के पास स्थित शेरथांग सामरिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। भारत और चीन के बीच स्थानीय सीमा-पार व्यापार के लिए भी इसे निर्धारित किया गया है। चीन की तरफ इसके सामने रिनचेनगांग नामक स्थान है। वर्ष 2003 में दोनों देशों की सरकारों ने इन स्थानों को सीमा व्यापार केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने पर सहमति जताई थी।
शेरथांग में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की चौकी भी मौजूद है। यह भारत और चीन के बीच सीमा कार्मिक बैठक (BPM) के निर्धारित बिंदुओं में शामिल है। यहां इंडिया पोस्ट और चाइना पोस्ट के बीच सप्ताह में दो बार अंतरराष्ट्रीय डाक का आदान-प्रदान भी होता है।
इस स्थान की एक और बड़ी पहचान यहां बना युद्ध स्मारक है। यह स्मारक 1967 में नाथू ला और चो ला में हुई सैन्य झड़पों के दौरान बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया है।
साल 1967 में नाथू ला क्षेत्र में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ने लगा था। 13 अगस्त से चीनी सैनिकों ने नाथू ला में खाइयां खोदनी शुरू कर दी थीं। भारतीय सैनिकों ने पाया कि कुछ खाइयां सीमा के स्पष्ट रूप से सिक्किम वाले हिस्से में बनाई जा रही थीं। भारतीय पक्ष ने इस पर स्थानीय चीनी कमांडर झांग गुओहुआ के सामने आपत्ति जताई और सैनिकों को वहां से हटाने की मांग की।
शुरुआत में चीनी सैनिकों ने कुछ खाइयों को भर दिया, लेकिन इसके बाद उन्होंने वहां पहले से मौजूद 21 लाउडस्पीकरों के अलावा आठ और लाउडस्पीकर लगा दिए। भारतीय सेना ने सीमा को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने के लिए नाथू ला की पहाड़ियों पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने का फैसला किया।
7 सितंबर को जब भारतीय सैनिकों ने दर्रे के दक्षिणी हिस्से में बाड़ लगाने का काम शुरू किया, तब चीनी कमांडर अपने सैनिकों के साथ वहां पहुंच गए। उन्होंने भारतीय लेफ्टिनेंट कर्नल राय सिंह यादव को काम रोकने की चेतावनी दी। इस दौरान दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच हाथापाई हुई और कुछ जवान घायल हो गए।
नाथू ला और चो ला की झड़पों में दोनों देशों के सैनिकों की जान गई थी। 15 और 16 सितंबर को शहीद हुए सैनिकों के शवों का आदान-प्रदान किया गया। इन घटनाओं को लेकर भारत और चीन के दावे अलग-अलग रहे। भारतीय और पश्चिमी दृष्टिकोण के अनुसार, संघर्ष की शुरुआत चीनी पक्ष की ओर से हुई थी, जबकि चीन ने भारतीय सैनिकों पर गोलीबारी शुरू करने का आरोप लगाया था।
भारत के रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों घटनाओं में भारतीय पक्ष के 88 सैनिक मारे गए और 163 घायल हुए, जबकि चीनी पक्ष के 340 सैनिक मारे गए और 450 घायल हुए। वहीं, चीन के दावों के मुताबिक, नाथू ला की घटना में उसके 32 और भारत के 65 सैनिक मारे गए थे। चो ला की घटना में चीन ने 36 भारतीय सैनिकों की मौत और अपने सैनिकों के हताहत होने की अज्ञात संख्या बताई थी।
इन झड़पों को 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद भारतीय सेना की बेहतर सैन्य तैयारियों और जवाबी क्षमता के महत्वपूर्ण उदाहरणों में गिना जाता है। ऐसे में दीपावली के दिन राजनाथ सिंह का शेरथांग युद्ध स्मारक पहुंचना 1967 के संघर्ष में बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
Location : New Delhi
Published : 7 November 2026, 5:50 PM IST