BRICS Summit 2026: पुतिन-मोदी वार्ता में ब्रह्मोस से लेकर पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर टिकी दुनिया की निगाहें

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे पर रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के मोर्चे पर बड़े समझौतों की तैयारी है। सुखोई-57, एस-400 और ब्रह्मोस जैसे रक्षा सौदों के साथ 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य पर चर्चा जारी है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 11 September 2026, 11:16 AM IST

New Delhi: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नई दिल्ली आगमन के साथ ही भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय वार्ताओं का दौर शुरू हो चुका है। शुक्रवार देर रात दिल्ली पहुंचने पर उनका स्वागत विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने किया। इस उच्चस्तरीय दौरे का मुख्य केंद्र बिंदु पारंपरिक संबंधों को आधुनिक समय की रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप ढालना है, जिसमें रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

सामरिक संबंधों का नया अध्याय: रक्षा सौदों पर टिकी निगाहें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक में रक्षा सहयोग सबसे ऊपर है। वर्तमान यात्रा इस बात की एक बड़ी परीक्षा मानी जा रही है कि कैसे दोनों देश वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद अपनी दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक उन्नत बना सकते हैं। रक्षा गलियारों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच तकनीक हस्तांतरण और सैन्य तैयारियों को नया आयाम कैसे देगी।

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अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान और तकनीक का आदान-प्रदान

रूस और भारत अब केवल खरीदार और विक्रेता के पुराने संबंधों से आगे निकल चुके हैं। दोनों देश अब संयुक्त अनुसंधान, विकास, उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर विशेष जोर दे रहे हैं। इस यात्रा के दौरान जिन प्रमुख सैन्य उपकरणों और समझौतों पर चर्चा हो रही है, उनके मुख्य बिंदु हैं-

सुखोई-57: रूस द्वारा भारत को पांचवीं पीढ़ी के इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की पेशकश की गई है। दोनों पक्ष इसकी संभावित खरीद और तकनीक हस्तांतरण के हर पहलू पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

ब्रह्मोस मिसाइल: दोनों देश ब्रह्मोस सुपरक्रूज़ मिसाइल के उन्नत संस्करण को लेकर चर्चा कर रहे हैं, जिससे सैन्य क्षमता में और इजाफा होगा।

एस-400 वायु रक्षा प्रणाली: इस रक्षा प्रणाली से जुड़े आगामी और शेष समझौतों को आगे बढ़ाना भी इस वार्ता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एजेंडा है।

ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग की गारंटी

पश्चिमी देशों के तमाम भारी दबावों और प्रतिबंधों के बावजूद भारत और रूस के बीच कच्चे तेल का व्यापार और ऊर्जा साझेदारी लगातार मजबूत बनी हुई है। पुतिन की इस यात्रा का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग है। इस दौरान भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से जुड़ी वार्ताओं को अंतिम रूप दिए जाने की पूरी तैयारी है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक समझौतों पर भी मुहर लगने की संभावना है।

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व्यापारिक विस्तार: 2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य

आर्थिक मोर्चे पर भारत और रूस अपने व्यापारिक रिश्तों को एक नए मुकाम पर ले जाने के लिए तैयार हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में रूसी उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंतोन अलीखानोव के साथ 'इनोप्रोम इंडिया 2026' के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए बताया कि दोनों देश एक नए द्विपक्षीय निवेश समझौते को तेजी से अंतिम रूप दे रहे हैं।

वर्तमान में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा लगभग 60 अरब डॉलर है, जिसे बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को तय सीमा में हासिल करने के लिए अगले चार वर्षों के भीतर व्यापार में करीब 40 अरब डॉलर की भारी वृद्धि करनी होगी। पुतिन का यह दौरा इसी दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित करने का एक बड़ा माध्यम बन रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  11 September 2026, 10:59 AM IST