विदेशी निवेशकों को लुभाने की तैयारी? सेबी ने LTCG टैक्स खत्म करने का दिया सुझाव

बाजार नियामक ने सरकार से विदेशी निवेशकों पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स खत्म करने की सिफारिश की है। बीते दो सालों में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयर बाजार से करीब 64 अरब डॉलर यानी लगभग 5.3 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। एलटीसीजी टैक्स में कटौती करे या इसे पूरी तरह हटा दे।

Post Published By: Ramdev Gupta
Updated : 4 November 2026, 11:15 AM IST

New Delhi: विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार से लगातार हो रही निकासी को रोकने के लिए सेबी ने एक अहम सुझाव दिया है। बाजार नियामक ने सरकार से विदेशी निवेशकों पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स खत्म करने की सिफारिश की है। दरअसल, बीते दो सालों में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयर बाजार से करीब 64 अरब डॉलर यानी लगभग 5.3 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इतनी बड़ी रकम बाजार से बाहर जाने के बाद निवेशकों और बाजार से जुड़े विशेषज्ञों के बीच यह मांग तेज हो गई है कि विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार एलटीसीजी टैक्स में कटौती करे या इसे पूरी तरह हटा दे। अब सेबी की इस सिफारिश के बाद इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई है।

विदेशी निवेशकों पर फिलहाल कितना टैक्स लगता है?

भारत में शेयर बाजार में निवेश करने वालों को शेयर बेचने पर होने वाले मुनाफे के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है। फिलहाल सूचीबद्ध शेयरों को एक साल के अंदर बेचने पर 20 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स लगता है। वहीं, एक साल से ज्यादा समय तक शेयर रखने के बाद बेचने पर 12.5 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना होता है। इसके अलावा शेयरों की खरीद-बिक्री पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) भी लगाया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेबी ने विदेशी निवेशकों को राहत देने के लिए उनके लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को हटाने का सुझाव दिया है। वहीं, सरकार भी आगामी फरवरी बजट से पहले इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसके लिए निवेशकों और टैक्स से जुड़े जानकारों से उनकी राय ली जा रही है।

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रुपये में कमाई, लेकिन डॉलर में नुकसान; विदेशी निवेशकों के सामने टैक्स की चुनौती

भारत में विदेशी निवेशकों के मुनाफे पर टैक्स की गणना रुपये के हिसाब से की जाती है, न कि डॉलर के आधार पर। ऐसे में कई बार निवेशकों को रुपये में तो फायदा होता दिखाई देता है, लेकिन डॉलर में हिसाब लगाने पर उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह रुपये की कीमत में गिरावट भी है। इसके बावजूद निवेशकों को रुपये में दिख रहे मुनाफे पर टैक्स देना पड़ता है। इस तरह के मुनाफे को 'फैंटम गेन्स' यानी कागजों पर दिखने वाला मुनाफा कहा जाता है। यही वजह है कि विदेशी निवेशक इस टैक्स व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

टैक्स में छूट से विदेशी निवेश कितना बढ़ेगा? जानिए विशेषज्ञों का अनुमान

जेएम फाइनेंशियल के विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सरकार विदेशी निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स पूरी तरह खत्म कर देती है, तो वित्त वर्ष 2027-28 तक भारत में करीब 3 से 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। हालांकि, पिछले दो सालों में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 64 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। ऐसे में संभावित नया निवेश इस निकासी के मुकाबले काफी कम होगा। विशेषज्ञों का यह भी अनुमान है कि टैक्स हटने से एक औसत विदेशी निवेशक की सालाना डॉलर में कमाई में केवल 2.2 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, ग्रो के फंड मैनेजर और रिसर्च हेड नीरज करखेरा का मानना है कि सिर्फ टैक्स में राहत देने से विदेशी निवेशक दोबारा भारतीय बाजार की ओर आकर्षित नहीं होंगे। इसके लिए निवेश से जुड़े दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।

विदेशी निवेश पर कच्चे तेल की कीमतों का भी पड़ता है असर

पिछले 20 सालों के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगाने या निकालने का फैसला सिर्फ टैक्स के आधार पर नहीं करते। कच्चे तेल की कीमतें भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच जाती है, तो विदेशी निवेशक अक्सर भारतीय बाजार से पैसा निकालने लगते हैं। वहीं, तेल की कीमत 90 डॉलर से नीचे या करीब 75 डॉलर प्रति बैरल रहने पर विदेशी निवेश में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। यानी कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश पर पड़ता है।

शेयर सस्ते होने के बाद भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

लगातार बिकवाली के कारण निफ्टी का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो घटकर 17.1 गुना रह गया है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, पुराने आंकड़ों के आधार पर यह स्तर निवेश के लिहाज से अच्छा माना जाता है। यानी शेयरों की कीमतें पहले के मुकाबले आकर्षक हो गई हैं। इसके बावजूद विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। बाजार में पहले भी ऐसे हालात देखने को मिले हैं, जब शेयरों के सस्ते होने के बाद भी बिकवाली नहीं रुकी। इससे साफ है कि केवल शेयरों की कम कीमत विदेशी निवेशकों को बाजार में दोबारा निवेश करने के लिए तैयार नहीं कर सकती।

Location :  New Delhi

Published :  4 November 2026, 10:56 AM IST