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पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं (फोटो: AI)
New Delhi: विदेश मंत्रालय के हालिया बयान के बाद देशभर में नागरिकता को लेकर नई बहस छिड़ गई है। 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं है। यह मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक दस्तावेज है। मंत्रालय के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई सवाल उठने लगे। लोगों ने पूछा कि अगर पासपोर्ट भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है तो फिर किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता कैसे तय होगी। आइए जानते हैं कि कानून इस बारे में क्या कहता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को विदेश यात्रा की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान तथा राष्ट्रीयता स्थापित करना है। हालांकि, इसे नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का हवाला देते हुए बताया कि विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार किसी गैर-नागरिक को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है। यही कारण है कि केवल पासपोर्ट के आधार पर नागरिकता का अंतिम निर्णय नहीं किया जा सकता।
भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किया जाता है। इसी कानून में यह तय किया गया है कि कोई व्यक्ति जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण या किसी क्षेत्र के भारत में विलय के आधार पर भारतीय नागरिक बन सकता है। दूसरी ओर, पासपोर्ट पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जारी किया जाता है। इसलिए दोनों कानूनों का उद्देश्य अलग-अलग है।
कानून के अनुसार विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार किसी गैर-नागरिक को भी यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है। इसलिए केवल पासपोर्ट होना नागरिकता की पूर्ण गारंटी नहीं माना जाता।
पासपोर्ट का मुख्य काम विदेश यात्रा को आसान बनाना है। यह पहचान और राष्ट्रीयता दर्शाता है, लेकिन नागरिकता संबंधी विवाद होने पर अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ सकती है।
नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम के तहत होता है, जबकि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया अलग कानून के अनुसार चलती है। इसी वजह से अदालतें केवल पासपोर्ट के आधार पर नागरिकता तय नहीं करतीं।
नागरिकता का सबसे मजबूत प्रमाण क्या है?
कानूनी रूप से गृह मंत्रालय द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र (Registration Certificate) या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र (Naturalisation Certificate) नागरिकता का सबसे मजबूत प्रमाण माना जाता है। हालांकि, यह दस्तावेज आमतौर पर उन लोगों को दिए जाते हैं जिन्होंने बाद में भारतीय नागरिकता प्राप्त की हो। जन्म से भारतीय नागरिकों के पास ऐसे प्रमाणपत्र प्रायः नहीं होते।
जन्म के आधार पर नागरिकता कैसे साबित होती है?
26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 तक जन्मे लोग
इस अवधि में भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति स्वतः भारतीय नागरिक माना जाता था। ऐसे मामलों में जन्म प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है।
1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 तक जन्मे लोग
इस अवधि में जन्म लेने वालों को यह साबित करना होता है कि जन्म के समय माता या पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक था।
3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे लोग
इन लोगों को यह साबित करना होता है कि माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हैं या उनमें से एक भारतीय नागरिक है और दूसरा अवैध प्रवासी नहीं है।
यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर विवाद खड़ा होता है तो अदालतें और संबंधित प्राधिकरण कई पुराने दस्तावेजों की जांच करते हैं। इनमें शामिल हैं—
1.भूमि रिकॉर्ड
2. पैतृक संपत्ति के दस्तावेज
3. पुरानी मतदाता सूचियां
4. स्कूल प्रमाण पत्र
5. परिवार से जुड़े रिकॉर्ड
ये दस्तावेज किसी व्यक्ति के भारत में निवास और पारिवारिक संबंधों को साबित करने में मदद करते हैं।
नहीं। आधार कार्ड केवल पहचान और निवास का प्रमाण है। यह नागरिकता साबित नहीं करता। आधार कानून के अनुसार, कुछ शर्तें पूरी करने वाले विदेशी नागरिक भी आधार कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए केवल आधार कार्ड के आधार पर नागरिकता साबित नहीं की जा सकती।
पैन कार्ड आयकर और वित्तीय लेनदेन से जुड़ा दस्तावेज है। इसे विदेशी नागरिकों और विदेशी कंपनियों को भी जारी किया जा सकता है। इसलिए यह नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता।
वोटर आईडी कार्ड मतदाता के रूप में पहचान का दस्तावेज है। हालांकि, अदालतें कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि केवल वोटर आईडी कार्ड के आधार पर नागरिकता तय नहीं की जा सकती। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलती से मतदाता सूची में दर्ज हो गया हो तो उसे हटाया भी जा सकता है।
केंद्र सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट में से कोई भी दस्तावेज अकेले भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है। किसी व्यक्ति की नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाता है। जरूरत पड़ने पर विभिन्न दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद ही नागरिकता से संबंधित अंतिम निर्णय लिया जाता है। पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है और सामान्य परिस्थितियों में यह भारतीय राष्ट्रीयता का मजबूत संकेत माना जाता है। लेकिन कानून की नजर में यह नागरिकता का अंतिम और अचूक प्रमाण नहीं है। भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत तय नियमों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।
Location : New Delhi
Published : 25 June 2026, 6:49 PM IST
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