
यूपी में फैल रहा धर्मांतरण का जाल (सोर्स इंटरनेट)
Lucknow: अंबेडकरनगर से आगरा, मिर्जापुर से प्रतापगढ़ तक, उत्तर प्रदेश में इन दिनों धर्मांतरण का एक सुनियोजित खेल चल रहा है। परंपरागत हिंसक तरीकों की जगह अब ‘सॉफ्ट कन्वर्ज़न’ की नई रणनीति अपनाई जा रही है, जिसमें धर्मांतरण का झांसा अब "चंगाई सभाओं", “प्रार्थना आयोजनों”, फर्जी ट्रस्टों और आर्थिक सहायता के वादों के साथ पेश किया जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ताजा मामला अंबेडकरनगर जिले का है, जहां एक चर्च के पादरी प्रमोद कुमार ने गरीब महिलाओं को दवाओं से ठीक होने, आर्थिक सहायता और बच्चों की पढ़ाई के सपने दिखाकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया। हर रविवार की “प्रार्थना सभा” दरअसल एक व्यवस्थित धर्मांतरण केंद्र बन चुकी थी। जब हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया, तब जाकर पुलिस हरकत में आई और पादरी को गिरफ्तार किया गया।
सिद्धार्थनगर में एक निजी स्कूल के मैनेजर पर आरोप है कि उसने क्लर्क की नौकरी के बदले धर्म बदलवाने की कोशिश की। पीड़ित युवक अखंड प्रताप ने बताया कि उसे पहले स्टांप पेपर पर दस्तखत कराए गए और फिर 20 लाख रुपये का लालच देकर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया गया। जब वह नहीं माना तो धमकी दी गई। अब आरोपी गिरफ्तार हो चुका है लेकिन सवाल यह है—क्या स्कूल अब सिर्फ शिक्षा के मंदिर हैं या वैचारिक युद्ध के अड्डे?
आगरा में जब दो लड़कियां गायब हुईं तो एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का खुलासा हुआ। आरोपी आयशा के फोन से अयोध्या के मंदिर तोड़ने की साजिश वाले वीडियो और कनाडा में बैठे साथी से बातचीत के स्क्रीनशॉट मिले। जांच में खुलासा हुआ कि इस रैकेट को विदेशी फंडिंग मिल रही थी, जो गोवा की एक महिला और यूएई-लंदन के रास्तों से भारत पहुंच रही थी।
विंध्यांचल और जेठवारा थाना क्षेत्रों में धर्मांतरण का तरीका अलग नहीं था यहां चंगाई सभा, झाड़-फूंक और चमत्कारी इलाज के नाम पर लोगों को लुभाया जा रहा था। मिर्जापुर में केरल से आए फर्जी ‘फादर’ विजय कुमार को गिरफ्तार किया गया, जबकि प्रतापगढ़ में 8 आरोपी पकड़े गए जो महीनों से गांव-गांव जाकर यीशु की चमत्कारी तस्वीरें और बाइबल बांट रहे थे।
Location : Lucknow
Published : 24 July 2025, 5:20 PM IST
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