
प्रतीकात्मक छवि (Image Source Internet)
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में वोट न देने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह एक नीतिगत मामला है और इस पर फैसला लेना सरकार और विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।
यह याचिका अजय गोयल द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि जो लोग मतदान नहीं करते, उनके खिलाफ पाबंदियां लगाई जाएं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां नागरिकों को अपने विवेक से निर्णय लेने की आजादी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई व्यक्ति वोट नहीं करना चाहता, तो उसे इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
CJI ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अदालत ऐसे लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दे सकती है, जो वोट नहीं डालते। उन्होंने कहा कि यह व्यावहारिक और संवैधानिक रूप से सही नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान CJI ने हल्के अंदाज़ में कहा कि अगर वोटिंग अनिवार्य कर दी जाए, तो जजों को भी अपने गृह राज्यों में जाकर वोट करना पड़ेगा, भले ही वह कार्यदिवस ही क्यों न हो। इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि न्यायिक कार्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
CJI ने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें रोज़ी-रोटी के लिए काम करना पड़ता है। अगर कोई गरीब व्यक्ति यह कहे कि वह काम छोड़कर वोट देने नहीं जा सकता, तो ऐसे में उसे मजबूर करना कैसे उचित होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से यह सुझाव भी दिया गया कि जो लोग वोट नहीं देते, उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जाए। इस पर CJI ने हल्के अंदाज़ में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “आप यह काम हमारी तरफ से कर लीजिए।”
अदालत ने स्पष्ट किया कि वोट न देने पर दंडात्मक प्रावधान लागू करना पूरी तरह से नीति का विषय है, जिसे सरकार और संसद ही तय कर सकती है।
Location : New Delhi
Published : 16 April 2026, 5:39 PM IST
Topics : CJI Suryakant elections SIR Supreme Court voting