क्या है Fast Track Court, जिसके गठन का पीएम ने किया ऐलान, जानिए कैसे तुरंत खत्म होगा पेपर लीक का खेल?

NEET पेपर लीक मामले पर PM मोदी का बड़ा ऐलान! दोषियों को तुरंत सजा दिलाने के लिए बनेगी फास्ट ट्रैक कोर्ट। पीएम मोदी ने कहा- युवाओं का भविष्य हमारी प्राथमिकता है, खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 23 July 2026, 10:06 AM IST
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New Delhi: देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। जंतर-मंतर पर युवाओं के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा ऐलान करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करने वालों के दिन अब पूरे हो चुके हैं।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन: नहीं लगेगी इंसाफ में देरी

प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि पेपर लीक और भर्ती धांधली से जुड़े सभी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Courts) बनाए जाएंगे। इसका सीधा मकसद ऐसे मामलों की सुनवाई को महीनों-साल लटकाने के बजाय जल्द से जल्द दोषियों को कानून के कटघरे में खड़ा कर सख्त से सख्त सजा दिलाना है। सरकार का यह कदम अदालती कार्यवाही की रफ्तार को तेज करेगा।

अधिकारियों को कड़े निर्देश

पीएम मोदी ने बताया कि इस संबंध में संबंधित मंत्रालयों और आला अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं। केवल अदालती कार्रवाई ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाने और सुरक्षा में चूक की हर गुंजाइश को खत्म करने के लिए डिजिटल निगरानी और कड़े तकनीकी प्रोटोकॉल लागू करने पर काम शुरू हो चुका है।

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युवाओं का हित ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने दोहराया कि देश के युवाओं की भलाई और उनका भविष्य सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए निर्णयों की यह एक अहम कड़ी है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या माफिया को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।" सरकार के इस फैसले से लाखों परीक्षार्थियों में उम्मीद की नई किरण जगी है।

क्या है फास्ट ट्रैक कोर्ट ?

फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court - FTC) एक ऐसी विशेष अदालत होती है, जिसका गठन किसी खास श्रेणी के मामलों या संवेदनशील अपराधों की सुनवाई को बिना किसी देरी के जल्द-से-जल्द पूरा करने के लिए किया जाता है।

साधारण अदालतों में मुकदमों का भारी बोझ होता है, जिसके कारण मामलों के निपटारे में सालों लग जाते हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट का मुख्य मकसद 'न्याय में देरी, न्याय की अवहेलना है' की स्थिति को खत्म करना और समयबद्ध तरीके से इंसाफ दिलाना है।

भारत में Fast Track Court की शुरुआत

भारत में फास्ट ट्रैक कोर्ट की अवधारणा 11वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद वर्ष 2000 में शुरू की गई थी। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य देश की अधीनस्थ अदालतों (Subordinate Courts) में वर्षों से लंबित पड़े लाखों मुकदमों का बोझ कम करना था।

इसके बाद 2012 के निर्भया कांड के बाद महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों को निपटाने के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (Fast Track Special Courts - FTSC) योजना शुरू की गई।

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फास्ट ट्रैक कोर्ट की मुख्य विशेषताएं

डे-टू-डे सुनवाई: आम अदालतों की तरह इसमें लंबी तारीखें नहीं दी जातीं। इसमें मामलों की सुनवाई रोजाना या बहुत कम अंतर पर होती है।

समय सीमा तय: इन अदालतों को किसी भी केस को एक तय समय (जैसे 3 महीने, 6 महीने या 1 साल) के भीतर निपटाने का लक्ष्य दिया जाता है।

विशेष मामलों पर ध्यान: फास्ट ट्रैक कोर्ट हर तरह के मुकदमे नहीं सुनतीं, बल्कि इन्हें केवल विशेष प्रकार के जघन्य मामलों (जैसे- बलात्कार, POCSO अधिनियम, महिलाओं/बच्चों के खिलाफ अपराध या हाल ही में घोषित पेपर लीक व भर्ती धांधली) के लिए ही गठित किया जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  23 July 2026, 10:06 AM IST

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