
भारी मात्रा में हथियार और गोलियां बरामद
Jharkhand: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। राज्य में चलाए जा रहे ऑपरेशन “नवजीवन” का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। कोल्हान, सारंडा और गुमला जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में सक्रिय 27 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है। इस सामूहिक सरेंडर के बाद नक्सली संगठनों में हड़कंप मच गया है।
आत्मसमर्पण करने वालों में भाकपा (माओवादी) के 25 और जेजेएमपी संगठन के 2 सदस्य शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से 17 हथियार और हजारों जिंदा गोलियां भी बरामद की हैं। झारखंड पुलिस का कहना है कि लगातार चल रहे अभियान और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण नक्सली संगठन अब कमजोर पड़ने लगे हैं।
झारखंड पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक राज्य में नक्सल संगठनों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक झारखंड के निर्देशन में चल रहा है, जिसमें झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कोबरा और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम शामिल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार जंगलों में चल रहे सर्च ऑपरेशन, सुरक्षा कैंपों की बढ़ती संख्या और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने नक्सलियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया है। इसी वजह से कई नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी संगठन के सदस्य केंद्रीय कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर और असीम मंडल की टीम से जुड़े हुए थे। ये सभी लंबे समय से कोल्हान और सारंडा के जंगलों में सक्रिय थे और कई नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे हैं। पुलिस के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वालों में छह एसजेडसीएम, छह एसीएम और 13 दस्ता सदस्य शामिल हैं। इनमें कई ऐसे नक्सली भी हैं जो संगठन के मारक दस्ते का हिस्सा थे और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे।
सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने अपने हथियार भी पुलिस के हवाले कर दिए। पुलिस ने इनके पास से 16 हथियार और 2857 गोलियां बरामद की हैं। इसके अलावा गुमला जिले में सक्रिय जेजेएमपी संगठन के एक एसजेडसीएम और एक एसीएम ने भी एक हथियार और 130 गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद का बरामद होना इस बात का संकेत है कि नक्सली संगठन अब भी हथियारबंद गतिविधियों को जारी रखने की तैयारी में थे। हालांकि लगातार दबाव के कारण उनके कैडर कमजोर होते जा रहे हैं।
झारखंड पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान 44 नक्सलियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं 29 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और पुलिस मुठभेड़ में 22 नक्सली मारे गए हैं। इन आंकड़ों को देखते हुए पुलिस का दावा है कि राज्य में नक्सली संगठनों की पकड़ लगातार कमजोर हो रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आने वाले महीनों में और भी नक्सली हथियार छोड़ सकते हैं।
पुलिस के मुताबिक पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा और सारंडा जैसे इलाकों में नक्सली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। इलाके में 21 नए एडवांस कैंप लोकेशन और फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए गए हैं। इन कैंपों की वजह से सुरक्षा बल अब जंगलों के अंदर तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं। लगातार सर्च ऑपरेशन और चौकसी के कारण नक्सलियों की आवाजाही और गतिविधियों पर काफी असर पड़ा है।
Location : Jharkhand
Published : 21 May 2026, 3:53 PM IST