150 KM दूर बह गया था वैज्ञानिक खजाना… तटरक्षक बल ने दिखाया कमाल, बंगाल की खाड़ी में चला रेस्क्यू ऑपरेशन

बंगाल की खाड़ी में 150 किलोमीटर दूर बह गया एक बेहद अहम वैज्ञानिक उपकरण, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। तेज लहरों और खराब मौसम के बीच भारतीय तटरक्षक बल ने ऐसा ऑपरेशन चलाया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। आखिर यह डेटा बॉय क्यों इतनी महत्वपूर्ण थी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 5 July 2026, 2:51 PM IST
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New Delhi: भारतीय तटरक्षक बल ने एक बार फिर समुद्र में अपनी दक्षता और साहस का शानदार परिचय दिया है। बंगाल की खाड़ी में अपनी निर्धारित जगह से करीब 150 किलोमीटर दूर बह गई एक बहुमूल्य वैज्ञानिक डेटा बॉय (Data Buoy) को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच सुरक्षित खोजकर वापस लाया गया। तेज हवाओं, ऊंची लहरों और कठिन समुद्री हालात के बावजूद यह अभियान सफल रहा।

यह डेटा बॉय समुद्री अनुसंधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे भारतीय तटरक्षक बल के जहाज 'रानी गैदिन्लियू' ने खोजकर सुरक्षित अपने नियंत्रण में लिया। इस सफलता को समुद्री वैज्ञानिक संसाधनों की सुरक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

क्या होती है वैज्ञानिक डेटा बॉय?

डेटा बॉय समुद्र में तैरने वाला एक विशेष वैज्ञानिक उपकरण होता है, जो लगातार समुद्री वातावरण से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाता है। यह समुद्र की लहरों की ऊंचाई, पानी का तापमान, समुद्री धाराओं की गति, हवा की दिशा और मौसम से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े रिकॉर्ड करता है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल मौसम विभाग, समुद्री वैज्ञानिक संस्थानों, तटीय सुरक्षा एजेंसियों और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों द्वारा किया जाता है। समय पर मिलने वाला यह डेटा चक्रवातों की निगरानी, समुद्री चेतावनी जारी करने और समुद्र में सुरक्षित संचालन के लिए बेहद उपयोगी होता है।

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150 किलोमीटर दूर बह गया था उपकरण

जानकारी के अनुसार, यह वैज्ञानिक डेटा बॉय आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तट के पास अपनी तय स्थिति पर स्थापित थी। लेकिन खराब मौसम और समुद्री परिस्थितियों के कारण यह अपनी जगह से बहकर करीब 150 किलोमीटर दूर चली गई।

समुद्र में किसी छोटे वैज्ञानिक उपकरण को तलाशना आसान नहीं होता। तेज लहरों के बीच उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना और उसे सुरक्षित निकालना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है। इसके बावजूद भारतीय तटरक्षक बल ने योजनाबद्ध तरीके से खोज अभियान चलाया और उपकरण को सुरक्षित बरामद कर लिया।

वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए बड़ी राहत

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफल अभियान से न केवल एक महंगा वैज्ञानिक उपकरण सुरक्षित बच गया, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले समुद्री अनुसंधान को भी नुकसान होने से बचा लिया गया। ऐसे उपकरणों को दोबारा तैयार करने और समुद्र में स्थापित करने में काफी समय और बड़ी लागत लगती है। इसलिए इनकी सुरक्षा वैज्ञानिक संस्थानों के लिए बेहद अहम होती है।

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सिर्फ सुरक्षा नहीं, वैज्ञानिक मिशनों की भी जिम्मेदारी

भारतीय तटरक्षक बल ने कहा कि उसका दायित्व केवल समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान या प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है। समुद्र में स्थापित वैज्ञानिक उपकरणों और राष्ट्रीय अनुसंधान परियोजनाओं की सुरक्षा भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। तटरक्षक बल का कहना है कि ऐसे अभियानों से देश की वैज्ञानिक गतिविधियों को निरंतर सहयोग मिलता है और समुद्री अनुसंधान बिना किसी रुकावट के जारी रह पाता है।

हाल ही में बचाई थी छह मछुआरों की जान

यह पहली बार नहीं है जब भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्र में अपनी तत्परता दिखाई हो। कुछ दिन पहले ही कर्नाटक के मंगलूरु तट के पास समुद्र में फंसी मछली पकड़ने वाली नौका 'मंजू माथा' से छह मछुआरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। नौका में खराब मौसम के कारण तेजी से पानी भरने लगा था। ऊंची लहरों, तेज हवाओं और कम दृश्यता के बीच तटरक्षक बल की टीम महज 90 मिनट में मौके पर पहुंची और विशेष लाइफबॉय की मदद से सभी मछुआरों को सुरक्षित बचा लिया।

Location :  New Delhi

Published :  5 July 2026, 2:51 PM IST

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